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मोहम्मद युनुस ने कहा कि 2026 की शुरुआत में बांग्लादेश में आम चुनाव हो सकते हैं

ढाका
बांग्लादेश में
अंतरिम सरकार के मुखिया नोबल विजेता मोहम्मद युनुस ने कहा है कि 2025 के आखिरी या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव कराए जा सकते हैं। तब तक अंतरिम सरकार ही देश की सरकार चलाएगी। शेख हसीना को हटाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। वहीं बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रहे हैं।

यूनुस ने सोमवार को एक टीवी चैनल को बताया कि चुनाव आखिरी 2025 या फिर 2026 की शुरुआत में ही होंगे। बांग्लादेश में युनुस पर आम चुनाव को लेकर अब दबाव बढ़ रहा है। वहीं तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। युनुस ने कहा कि चुनाव कराने से पहले बहुत सारे सुधार करने की जरूरत है। वोटर लिस्ट में सुधार केसाथ ही चुनावी प्रक्रिया को भी सुधारना है।

इससे पहले 7 जनवरी 2024 को ही बांग्लादेश में आम चुनाव करवाए गए थे। लागातर चौथी बार शेख हसीना की आवामी लीग ने जीत दर्ज की थी। विजय दिवस के मौके पर मोहम्मद युनुसन ने चुनाव को लेकर प्लान सामने रखा है। वहीं शेख हसीना ने रविवार को देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर एक और तीखा हमला किया तथा उन पर एक ऐसे ‘अलोकतांत्रिक समू’’ का नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जिसकी लोगों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है। ‘विजय दिवस’ की पूर्व संध्या पर एक बयान में हसीना ने यूनुस को ‘फासीवादी’ कहा और आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व वाली सरकार का मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना को दबाना है।

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बांग्लादेश 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाता है। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ 13 दिन के युद्ध के बाद भारतीय सेना और ‘मुक्ति वाहिनी’ की संयुक्त सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया।

हसीना ने अपने बयान में कहा कि ‘राष्ट्र विरोधी समूहों’ ने असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘फासीवादी यूनुस के नेतृत्व वाले इस अलोकतांत्रिक समूह की जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘वे सत्ता पर कब्जा कर रहे हैं और सभी जन कल्याण कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।’

हसीना ने यूनुस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यह सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई नहीं है, इसलिए लोगों के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य मुक्ति संग्राम और मुक्ति समर्थक ताकतों की भावना और उनकी आवाज को दबाना है।’

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