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GDP डेटा पर सवाल पड़े भारी? चीन के चर्चित अर्थशास्त्री की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप

बीजिंग 
चीन की अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट पर बेबाक राय रखने वाले चीनी अर्थशास्त्री गाओ शानवेन 55 साल की उम्र में मृत पाए गए हैं. चीन की सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की वजह 'बीमारी' बताई है. गाओ शानवेन ने कहा था कि 2021 से 2023 के बीच चीन की GDP ग्रोथ को 10 प्रतिशत अंक ज़्यादा बताया गया हो सकता है. गाओ शानवेन चीन के GDP डेटा पर खुलकर प्रश्न उठा रहे थे। 

इस अर्थशास्त्री की मौत पर लोगों ने गहरा दुख जताया है. सोशल मीडिया पर उन्हें ऐसे देश में जहां आजाद आवाज़ों को बर्दाश्त नहीं किया जाता, उन्हें "निडर होकर सच बोलने वाला" माना जाता था। 

सरकारी स्वामित्व वाले 'शंघाई सिक्योरिटीज न्यूज़' की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी नियंत्रण वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप 'SDIC सिक्योरिटीज' के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गाओ शानवेन का 55 साल की उम्र में "बीमारी के कारण" निधन हो गया। चाइनीज रिपोर्ट में उनकी मौत के समय के बारे में तो नहीं बताया गया लेकिन उन्हें "चीन के कैपिटल मार्केट में सबसे प्रभावशाली मैक्रो-इकोनॉमिस्ट्स में से एक" बताया गया। 

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'चीन की GDP ग्रोथ मात्र 2 फीसदी'
गाओ 2024 के आखिर में तब चर्चा में
आए जब उन्होंने वाशिंगटन में पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स और एक चीनी थिंक-टैंक द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले दो-तीन सालों में चीन की असल GDP ग्रोथ औसतन "लगभग 2 प्रतिशत" रही होगी, जो कि सरकारी आंकड़ों (लगभग 5 प्रतिशत) से काफी कम है। 

वे उपभोग, रोजगार, रियल एस्टेट डेटा में गड़बड़ियों का हवाला देते थे. उन्होंने युवा बेरोजगारी, उपभोग में मंदी और नीतिगत प्रतिक्रिया की कमी पर भी चिंता जताई थी। 

 कहा जाता है कि उनके इन बयानों से चीन का केंद्रीय नेतृत्व बेहद नाराज हुआ. सरकार ने उन्हें अनिश्चितकाल के लिए सार्वजनिक रूप से बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया. उनके वीडियो, लेख और सोशल मीडिया अकाउंट्स (वीचैट आदि) सेंसर/डिलीट कर दिए गए। 

सिक्योरिटीज एसोसिएशन ऑफ चाइना ने चीफ इकोनॉमिस्ट्स को "सरकार की नीतियों का सकारात्मक प्रचार" करने और "अनुचित टिप्पणियों" से बचने का निर्देश दिया था. नवंबर 2025 में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया और उनका हांगकांग इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस भी समाप्त हो गया। 

विरोध के लिए चीन में जगह नहीं
बता दें कि बीजिंग GDP के लिए सरकारी लक्ष्य तय करता है और शायद ही कभी उनसे चूकता है.  गाओ शानवेन के इस बयान ने चीन के आर्थिक के डेटा की सटीकता को लेकर अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों के शक को और पुख्ता कर दिया था। 

इसके बाद गाओ लगभग एक साल तक लोगों की नजर से दूर रहे और फिर सितंबर 2025 में पेकिंग यूनिवर्सिटी के एक फोरम में वीडियो के ज़रिए भाषण देने के लिए कुछ समय के लिए सामने आए।  
हालांकि खबर थी कि उनकी जांच चल रही है, लेकिन मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि गाओ ने अपने दोस्तों और साथियों को यह भी बताया था कि उन्हें जनवरी 2025 में पता चला कि उन्हें कैंसर है. 

सच बोलने वाला चला गया
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी सोशल मीडिया साइट 'रेडनोट' पर एक कमेंटेटर ने कहा, "एक ऐसे अर्थशास्त्री जो सच बोलते थे; पिछले कुछ सालों में, सिर्फ़ 'आशावादी' अर्थशास्त्री ही बचे हैं। 

चीन की माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'वीबो' पर एक और कमेंट में लिखा था, "एक और सच बोलने वाला चला गया, जबकि झूठ बोलने वाले अभी भी बकवास कर रहे हैं. डॉ. गाओ आपकी आत्मा को शांति मिले!"

चीनी अधिकारी अक्सर उन व्हिसलब्लोअर और कमेंटेटर की आवाज़ दबा देते हैं जो सरकारी रुख को चुनौती देने वाली स्वतंत्र राय रखते हैं, चाहे मामला आम आर्थिक विषयों का ही क्यों न हो. चीन के दिग्गज उद्योगपति जैम मा भी एक बार ऐसे ही अपनी सरकार की आलोचना करने के बाद कुछ महीनों के लिए गायब हो गए थे। 

चीन में विरोध को कुचलने का लंबा इतिहास
2023 में जब चीन सख़्त कोविड लॉकडाउन हटाने के बाद मुश्किलों से जूझ रहा था और सालों से चला आ रहा प्रॉपर्टी संकट जारी था, तो सरकार ने एनालिस्ट को आर्थिक विकास पर नकारात्मक टिप्पणी न करने की चेतावनी दी और प्रमुख कमेंटेटरों पर सेंसरशिप लगाई।

चीन के सबसे मशहूर आर्थिक ब्लॉगर्स में से एक वू शियाओबो को उसी साल जून में 'वीबो' से ब्लॉक कर दिया गया था, जहां उनके लगभग 50 लाख फ़ॉलोअर्स थे. उन पर नुकसानदेह जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया था। 

2020 में वुहान के डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत ने, जिन्होंने कोविड-19 के सामने आने की बात सबसे पहले बताई थी पूरे देश में ऑनलाइन श्रद्धांजलि का माहौल बना दिया था. लोगों ने मोमबत्तियों की तस्वीरें और "कभी न भूलें" जैसे संदेश ऑनलाइन पोस्ट करके उन्हें याद किया। 

गाओ अपनी संक्षिप्त और प्रभावशाली लेखन शैली के लिए भी मशहूर थे. 2024 में उन्होंने कहा था कि चीन में "बुज़ुर्गों में भरपूर जोश है, युवा बेजान हैं और अधेड़ उम्र के लोग ज़िंदगी से थक चुके हैं." यह इस बात की ओर इशारा था कि कैसे बुज़ुर्गों ने तेज़ी के दौर का फ़ायदा उठाया, जबकि बाद की पीढ़ियां पिछली अति-ज़्यादतियों की कीमत चुका रही थीं। 

 

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