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सिख संस्था का ऐतराज दरकिनार, वीर बाल दिवस में शामिल होंगे पीएम नरेंद्र मोदी; नहीं बदलेगा नाम

 नई दिल्ली 
पीएम नरेंद्र मोदी सोमवार को 'वीर बाल दिवस' के कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसी साल 9 जनवरी को प्रधानमंत्री ने ऐलान किया था कि इस साल से प्रति वर्ष 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' मनाया जाएगा। यह आयोजन गुरु गोविंद सिंह के 4 साहिबजादों के बलिदान को नमन करने के लिए होना है। आज वीर बाल दिवस के पहले आयोजन में पीएम नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। यह कार्यक्रम दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम में होना है। सुबह 11 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में 3000 बच्चे मार्च निकालेंगे। इसके अलावा बच्चों की ओर से ही शबद कीर्तन किया जाएगा। यही नहीं आज ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार विजेताओं का भी ऐलान किया जाएगा। इसके अलावा पीएम राष्ट्र को संबोधित करेंगे। 

बता दें कि सिखों की शीर्ष संस्था एसजीपीसी ने 'वीर बाल दिवस' नाम पर ऐतराज जताया है। एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने रविवार को सिख समुदाय से कहा कि वह इस दिन को ‘वीर बाल दिवस’ की जगह ‘साहिबजादे शहादत दिवस’ के रूप में मनाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल जनवरी में ऐलान किया था कि सिखों के 10वें गुरु के बेटों जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत के उपलक्ष्य में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। धामी ने कहा, 'साहिबजादों के शहादत दिवस को भारत सरकार की ओर से ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाना महान शहादत को कमतर करने की एक दुर्भावनापूर्ण साजिश है।'

  उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि उत्तर से मुगलों को उखाड़ फेंकने के लिहाज से गुरु गोविंद सिंह के दोनों बेटे अहम थे। धामी ने कहा कि इस दिवस को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाये जाने को लेकर सरकार जिस तरह से अड़ी हुई है, उससे यह साफ हो जाता है कि सिख विरोधी ताकतों के इशारे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संस्कृति मंत्री को एक पत्र भेजा था, लेकिन सरकार ने अब भी नाम में परिवर्तन नहीं किया है।

साहिबजादों ने धर्म नहीं छोड़ा और चुनी बलिदान की राह

बता दें कि औरंगजेब नने 1704 में आनंदपुर साहिब पर कब्जा कर लिया था। पूरे शहर में मुगल सेना घेरेबंदी किए पड़ी थी और सिख फौजों के सामने निकलने का रास्ता नहीं था। यहां तक कि आनंदपुर के किले में घिरी सिख सेना के पास राशन तक नहीं पहुंच पा रहा था। गुरु गोबिंद सिंह ने इसी दौरान आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दिया था और निकल गए। लेकिन मुगलों ने अपना वादा तोड़ते हुए उनका पीछा किया। गुरु गोबिंद सिंह अपने दोनों छोटे पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को छोड़ गए थे। जिन्हें औरंगजेब के सेनापति नवाब वजीर खान ने अगवा कर लिया था। दोनों साहिबजादों को सरहिंद ले जाया गया और उनसे बचने के लिए इस्लाम अपनाने को कहा गया।

बलिदान के स्थान को ही कहते हैं फतेहगढ़ साहिब

दोनों साहिबजादों ने धर्म परिवर्तन करने की बजाय बलिदान की राह चुनी। कहा जाता है कि इससे इनकार पर औरंगजेब के नवाब ने दोनों साहिबजादों को जिंदा ही दीवार में चिनवा दिया था। दोनों साहिबजादों को जहां जिंदा चिनवा दिया गया था, उस स्थान को फतेहगढ़ साहिब के नाम से जाना जाता है। उस बलिदान की याद में ही केंद्र सरकार की ओर से वीर बाल दिवस मनाने का ऐलान किया गया है।
 

KhabarBhoomi Desk-1

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