राजनैतिक

MCD में हार के बाद BJP को लोकसभा चुनाव का डर? पंजाबियों को साधने के लिए दिल्ली में सचदेवा पर लगाया दांव

 नई दिल्ली 

दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD) चुनाव में मिली हार के बाद दिल्ली भाजपा की निगाहें अब 2024 के लोकसभा चुनाव पर आकर टिक गई हैं। भाजपा हर हाल में दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीतकर हैट्रिक बनाना चाहती है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष रहे आदेश गुप्ता ने एमसीडी में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए रविवार को इस्तीफा दे दिया था। भाजपा ने वीरेंद्र सचदेवा (Virendra Sachdeva) को दिल्ली प्रदेश का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया है। पंजाबी समुदाय से आने वाले वीरेंद्र सचदेवा को अगले आदेश तक के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है।

दिल्ली भाजपा के नए कार्यवाहक वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2024 के चुनावों में दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर पार्टी की जीत के लिए काम करना शुरू करने का आह्वान किया है। सचदेवा अपनी टीम के साथ अभी से इसकी तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि मेरा लक्ष्य आज से ही 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के संदेश को जन-जन में प्रसारित कर अगले लोकसभा चुनाव में फिर से भाजपा के सभी सातों सांसद प्रत्याशियों को सफलता दिलाने के लिए कार्य करना है। 

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भाजपा ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव में 250 में से 104 वार्ड जीते हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बार 134 सीटें जीतकर एमसीडी में भाजपा का 15 साल का शासन खत्म कर दिया। एमसीडी में नहीं दिया पंजाबियों ने साथ : भाजपा प्रदेशध्यक्ष के रूप में 17 साल बाद कोई पंजाबी समुदाय का अध्यक्ष मिला है। इससे पहले ओपी कोहली को प्रदेशध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी जानकारों की मानें तो एमसीडी चुनाव में पार्टी को पंजाबी समुदाय का वोट नहीं मिला है। यही वजह है कि हरि नगर, जनकपुरी, उत्तम नगर, पटेल नगर व राजेंद्र नगर इलाके के वार्ड जो पंजाबी बाहुल्य है, वहां भाजपा हार गई है, जबकि दिल्ली में पंजाबी मतदाता भाजपा का परंपरागत वोट माना जाता है। हर चुनाव में यह वोट भाजपा के साथ खड़ा रहता था।

प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर थे : इससे पहले राजेंद्र नगर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करा पड़ा था। यह विधानसभा सीट भी पंजाबी बाहुल्य सीट माना जाता है। यही वजह है कि पार्टी को पंजाबी मतदाताओं को दोबारा अपने साथ जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है। वर्तमान में वीरेंद्र सचदेवा प्रदेश में उपाध्यक्ष के पद पर थे। उनके नाम की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं, विधायकों व संगठन के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

विभाजन के समय दिल्ली आया था परिवार

वीरेंद्र सचदेवा का परिवार 1947 में देश विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर पुरानी दिल्ली में आकर बसा था। किशोरावस्था में स्वयंसेवक रहे वीरेंद्र सचदेवा स्नातक के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रथम वर्ष शिक्षित हैं। 1988 से राजनीति में सक्रिय सचदेवा चांदनी चौक भाजपा जिला में उपाध्यक्ष, महामंत्री रहे और फिर 2007 में चांदनी चौक के जिलाध्यक्ष बने। अपना रिहायश बदलने के बाद भी वह वर्ष 2014 में मयूर विहार जिले के अध्यक्ष चुने गए। उससे पहले 2009 में प्रदेश में मंत्री रहे और 2020 में प्रदेश उपाध्यक्ष बने। समय-समय पर पार्टी के विभिन्न संगठात्मक जिलों के प्रभारी भी रहे हैं। वर्ष 2012 से 2014 तक दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ता प्रशिक्षण प्रमुख रहे। वर्ष 2017 से 2020 तक पार्टी की राष्ट्रीय गुड गर्वनेन्स विभाग के सदस्य रहे।

हार के बाद संगठन में हो रही थी बदलाव की मांग

भाजपा के एमसीडी चुनाव हारने के तुरंत बाद प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की मांग उठने लगी थी। बदलाव की मांग के बीच आदेश गुप्ता ने चुनाव नतीजे वाले दिन एक बैठक में कहा था कि वह अपने खिलाफ साजिशों से हार मानने वाले नहीं हैं। जून 2020 में भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पद का प्रभार संभालने के बाद से ही गुप्ता के प्रदर्शन पर नजरें रही हैं। उनके नेतृत्व में ही पार्टी 2021 में एमसीडी के कुछ वार्ड और राजेंद्र नगर विधानसभा सीट पर उपचुनावों में जीत हासिल करने में नाकाम रही थी। भाजपा की दिल्ली इकाई के कुछ पदाधिकारियों के अनुसार, गुप्ता के इस्तीफे के ज्यादा मायने नहीं है, क्योंकि वैसे भी उनका कार्यकाल समाप्त होने के करीब था। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के संगठनात्मक चुनाव जनवरी 2023 में संपन्न होने वाले हैं। 
 

KhabarBhoomi Desk-1

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