
छत्तीसगढ राजभाषा आयोग की स्मृति पुस्तकालय योजना के तहत आज ज्ञान और संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा एवं सचिव अभिलाषा बेहार ने छत्तीसगढ़ी एवं स्थानीय भाषाओं से संबंधित पुस्तकों का दान कर युवाओं के भविष्य निर्माण में सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर डॉ गौरव सिंह ने पुस्तकें ग्रहण करते हुए इस पुनीत कार्य की सराहना की तथा दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समाज को ज्ञान से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं और इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी।स्मृति पुस्तकालय योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 13 हजार पुस्तकें एवं इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स दान किए जा चुके हैं। यह सामग्री जरूरतमंद विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रही है।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल को शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से पुस्तक दान अभियान से जुड़ने की अपील की।






