विदेश

पश्चिम एशिया तनाव: फ्रांस ने अमेरिका के सैन्य प्रोजेक्ट से बनाई दूरी, कूटनीति पर जोर

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी संकट के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कर दिया है कि यूरोप इस मुद्दे पर अमेरिका से अलग रणनीति अपनाएगा। फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप अपना स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है और अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी अस्पष्ट सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं बनेगा

आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में आयोजित यूरोपीय पॉलिटिकल कम्युनिटी की 8वीं बैठक में मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय संघ अपनी सुरक्षा और रक्षा के लिए खुद समाधान बना रहा है। हम अपनी किस्मत अपने हाथ में ले रहे हैं और कॉमन सिक्योरिटी फ्रेमवर्क विकसित कर रहे हैं।

अमेरिकी प्रोजेक्ट फ्रीडम से दूरी
मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट फ्रीडम में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। यह पहल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहालकरने के लिए शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि हम ऐसी किसी पहल में हिस्सा नहीं लेंगे, जिसका ढांचा स्पष्ट न हो। हालांकि फ्रांस ने जलमार्ग को फिर से खोलने के प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी फोर्स-बेस्ड ऑपरेशन में शामिल नहीं होगा, जब तक कि उसका स्पष्ट और सहमति आधारित ढांचा न हो।

कूटनीतिक समाधान पर जोर
मैक्रों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का सबसे टिकाऊ तरीका अमेरिका और ईरान के बीच समन्वित समझौता है। उन्होंने फ्री और बिना टोल के नेविगेशन को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत को ही एकमात्र रास्ता बताया।

जमीन पर तनाव बरकरार
इस बीच, क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। 28 फरवरी के बाद से तनाव तेजी से बढ़ा है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए और जवाब में तेहरान ने भी इजरायली ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब आती है, तो उस पर हमला किया जाएगा।

बातचीत की कोशिशें जारी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका के प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, जो पाकिस्तान के जरिए मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल प्राथमिकता सिर्फ युद्ध को रोकना है, जबकि परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चर्चाओं को अटकल बताया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार के बीच फोन पर बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय हालात और शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा की, जबकि ईरान ने पाकिस्तान की रचनात्मक और ईमानदार कूटनीतिक कोशिशों की सराहना की।

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