
गर्मी के मौसम में भारतीय घरों में सदियों से पानी के मटकों का इस्तेमाल होता रहा है। मिट्टी के घड़े में रखा हुआ पानी सेहत के लिए अमृत के समान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी पानी के मटके को घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। मिट्टी का घड़ा घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है। अगर वास्तु के अनुसार पानी का मटका रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। आइए वास्तु गुरु मान्या जी से जानते हैं कि पानी के मटकों के घर में रखना के क्या वास्तु नियम हैं।
घर में पानी का मटका रखने की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पानी का मटका हमेशा घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर के ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। ईशान कोण को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। ऐसे में घर की इस दिसा में पानी का मटका रखना सुख-समृद्धि लाता है और आर्थिक परेशानियों को दूर करता है।
इस दिशा में न रखें पानी का मटका
पानी के मटके को कभी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं रखना चाहिए। इसे वास्तु दोष माना जाता है और यह आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा पानी के मटके को बाथरूम के पास या सीढ़ियों के नीचे रखना भी अशुभ माना जाता है।
मटका कभी भी खाली न रखें
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, पानी के मटके को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए। इसे हमेशा पानी से भरा रखना चाहिए। पानी से भरा हुआ मटका घर में सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है और घर में कभी धन की कमी नहीं होती है। मटके के आस-पास साफ सफाई बनाए रखनी चाहिए।
घर में टूटा हुआ घड़ा न रखें
घर में टूटा हुआ या चटका हुआ मटका रखना अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, खंडित मटका नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर में आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती है। ऐसे में इसे तुरंत हटा देना चाहिए। मटके से पानी का टपकना धन की बर्बादी का कारण माना जाता है।
मटका खरीदने का शुभ दिन
वास्तु के अनुसार, मिट्टी का घड़ा घर में सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बुधवार और गुरुवार को पानी का मटका खरीदना सबसे शुभ फल देने वाला होता है। इसके अलावा मंगलवार को शनिवार के दिन मटका नहीं खरीदना चाहिए। वहीं, वैशाख मास में घड़ा खरीदना और दान करना दोनों ही शुभ माने जाते हैं।
सबसे जरूरी बात
सबसे जरूरी बात
नया मटका घर लाने के बाद उसको साफ करने बेहद जरूरी है। सबसे पहले उसपर गंगा जल का छिड़काव करें और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद पीने का पानी भरें। ध्यान रखें की मटके में पहली बार भरा हुआ पानी पौधों में डाल दें। इसके बाद मटके को भरकर पीने के लिए इस्तेमाल करें।






