छत्तीसगढ़

आयुर्वेदिक परंपरा और स्वस्थ बाल्य जीवन के महत्व को किया रेखांकित

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज धमतरी जिले के ग्राम छाती स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित चंद्रनाहू (चंद्राकर) कुर्मी-क्षत्रिय समाज के केंद्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अधिवेशन परिसर में लगाए गए विभिन्न प्रदर्शनी एवं जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन किया तथा बच्चों को स्वर्ण प्राशन संस्कार कराकर स्वस्थ एवं सशक्त बाल्य जीवन का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न संस्कारों की समृद्ध परंपरा रही है। स्वर्ण प्राशन भी ऐसे ही महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है, जिसका उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है। यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक माना जाता है।

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उल्लेखनीय है कि स्वर्ण प्राशन बच्चों में किए जाने वाले प्रमुख संस्कारों में से एक है। आयुर्वेद में इसे बाल स्वास्थ्य संवर्धन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना गया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में जिस प्रकार विभिन्न टीकों के माध्यम से बच्चों की प्रतिरक्षा क्षमता को मजबूत किया जाता है, उसी प्रकार आयुर्वेद में वैदिक काल से स्वर्ण प्राशन संस्कार के माध्यम से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का उल्लेख मिलता है। इसे आयुर्वेदिक इम्यूनाइजेशन की पारंपरिक प्रक्रिया के रूप में भी देखा जाता है।

अधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों से भेंट कर सामाजिक एकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के संबंध में चर्चा की। उन्होंने समाज द्वारा बच्चों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर कुरूद विधायक  अजय चंद्राकर,  विनोद चंद्राकर,  पूनम चंद्राकर, समाज के केंद्रीय अध्यक्ष  दिनेश चंद्राकर सहित समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

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