मध्यप्रदेश

किसानों की फसल बाजार में भैंसाखड़ी कृषि मंडी में फिर सन्नाटा, फसल बेचने किसान भी नहीं आ रहे

भोपाल
किसानों की फसल बाजार में आने के बावजूद ग्राम भैंसाखेड़ी स्थित पं. दीनदयाल कृषि उपज मंडी में सन्नाटा है। इससे पहले यहां गेहूं की अपेक्षित नीलामी भी नहीं हो सकी थी। अब सोयाबीन, मक्का एवं धान की नीलामी नहीं हो पा रही है। किसान सीधे करोंद मंडी जा रहे हैं। अनाज व्यापारियों की भी नीलामी में रुचि नहीं है।
इस बार गेंहूं की फसल लेकर कम ही किसान मंडी तक पहुंचे। मंडी समिति ने सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर खरीदी की। व्यापारियों की घटती रुचि के कारण मंडी सुनसान होती जा रही है। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष जगदीश आसवानी के अनुसार बैरागढ़ एवं आसपास के इलाके में कृषि भूमि कम बची है। अधिकांश किसान फसल बेचने सीहोर एवं करोंद मंडी जा रहे हैं। इस कारण मंडी में कारोबार कम हो गया है। सोयाबीन की खरीदी की उम्मीद भी पूरी नहीं हो पा रही है। उधर, मंडी में धर्मकांटा लगाने के प्रस्ताव पर अमल नहीं हो पा रहा है। धर्मकांटा नहीं होने के कारण अनाज की तुलाई धीमी गति से होती है। पिछले दिनों किसानों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन धर्मकांटा नहीं लग सका।
दाल एवं आटा मिल शिफ्ट करने का सुझाव
यहां पर कृषि उपज मंडी का निर्माण लंबे संघर्ष के बाद हुआ था। पहले मंडी को मुबारकपुर में बनाया जा रहा था। व्यापारिक संगठनों के संघर्ष और कांग्रेस एवं भाजपा नेताओं के बीच आपसी सहमति के बाद मंडी भैंसाखेड़ी में ही बनी। लेकिन इस मंडी में कारोबार बहुत कम हो गया है। मंडी समिति एवं व्यापारी संघ के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। व्यापारी कहते हैं कि हम खरीद करना चाहते हैं, पर किसान ही नहीं आते। अनाज व्यापारी संघ के संस्थापक सदस्य नरेश पारदासानी का कहना है कि मंडी समिति को दाल एवं आटा मिलों को मंडी के अंदर जगह देनी चाहिए। इससे मंडी की रौनक बढ़ेगी। किसान भी आएंगे।

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