राजनैतिक

सुखविंदर सिंह सुक्खू को संगठन में पकड़ से मिली हिमाचल की सत्ता, CM बनने से बस इस कारण चूक गईं प्रतिभा

हिमाचल प्रदेश 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू  को हिमाचल का नया मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने साफ कर दिया कि आम परिवार से आने वाले और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को पूरी तरजीह दी जाएगी। छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद बनी खाई को भरना और विधायक दल के नेता के नाम पर सहमति बनाना आसान नहीं था, लेकिन, प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के प्रभाव वाले मंडी जिले में दस में से सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस की जीत ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनका दावा कमजोर कर दिया।

वहीं, सुक्खू के हमीरपुर जिले की पांच में से चार पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। हमीरपुर पूर्व मुखमंत्री प्रेम कुमार धूमल का गृह जिला है। ऐसे में पार्टी की जीत से सुक्खू का दावा मजबूत हुआ। सुक्खू खुद भी हमीरपुर की नादौन से विधायक हैं।

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दो नाम पूछे : सूत्रों के मुताबिक, सभी नवनिर्वाचित विधायकों से सीएम पद के लिए दो नाम पूछे गए थे। इसमें सुक्खू के नाम पर मुहर लगाई।

छात्र नेता से सीएम तक का सफर

●सुक्खू ने संगठन में अपनी शुरुआत छात्र विंग एनएसयूआई से की। 1988 से 1995 तक इसके प्रदेश अध्यक्ष रहे।

●दो बार पार्षद भी बने। अब तक पांच बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। इसमें से चार बार जीत हासिल की।

●पहली बार साल 2002 में नदौण सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद सुक्खू 2007, 2017, 2022 का चुनाव जीते।

●2013 से 2019 तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। इस बार चुनाव प्रचार समिति की कमान संभाली।

सुक्खू का मजबूत पक्ष

1. आम परिवार से ताल्लुक, जनता पर गहरी पकड़।

2. संगठन में कई पद पर रहे, कार्यकर्ताओं में पैठ।

3. ज्यादा विधायको का समर्थन, कार्यकर्ताओं की पसंद

4. चार दशक से पार्टी में हाईकमान से तालमेल।

वीरभद्र के करीबी रहे हैं मुकेश
पत्रकारिता के पेशे से राजनीति में आए 60 वर्षीय मुकेश अग्निहोत्री कांग्रेस की दूसरी पीढ़ी के कद्दावर नेताओं में माने जाते हैं। उन्हें उप मुख्यमंत्री पद के लिए निर्वाचित किया गया है। वे हमेशा वीरभद्र सिंह के बेहद करीबी रहे। पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। लगातार पांचवीं बार विधायक बने है. वे लोअर हिमाचल के ऊना ज़िले से आते हैं। साल 2012 से 2017 तक कैबिनेट मंत्री रहे।

ये भी वजह रही
प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का सांसद होना भी सुक्खू के लिए फायदेमंद साबित हुआ। पार्टी प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती तो किसी एक विधायक को इस्तीफा देना पड़ता। ऐसे में एक साथ लोकसभा और विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव होते। साथ ही प्रतिभा या उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को मुख्यमंत्री बनाने से भाजपा को परिवारवाद का मुद्दा मिल जाता। सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि जो वादे हमने हिमाचल की जनता से किए हैं, उन्हें अक्षरश लागू करने की जिम्मेदारी मेरी है। जनता के हित में पूरी मेहनत से काम किया जाएगा। 
 

KhabarBhoomi Desk-1

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