मध्यप्रदेश

SIT चार्जशीट का दावा, IAS संतोष वर्मा के प्रमोशन के लिए नियमों की अनदेखी; 140 कॉल और रिजॉर्ट मीटिंग चर्चा में

इंदौर 

इंदौर के बहुचर्चित आईएएस संतोष वर्मा और तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत केस में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विजेंद्र सिंह रावत को विभागीय कार्रवाई से राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट में दर्ज कई चौंकाने वाले तथ्य दोबारा सुर्खियों में आ गए हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एसआईटी की चार्जशीट में दोनों के बीच के घटनाक्रम को लेकर क्या बड़े दावे किए गए हैं।

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140 बार फोन पर बात और रिजॉर्ट में मुलाकात
एसआईटी की जांच के अनुसार, तत्कालीन जिला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत और आईएएस संतोष वर्मा के बीच मोबाइल पर करीब 140 बार बातचीत हुई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इन संपर्कों के बाद ही पूरे मामले में तेजी आई।

चार्जशीट के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2020 को दोनों के बीच फोन पर बात हुई और फिर दोनों ने इंदौर के ग्रैंड माचल रिजॉर्ट में मुलाकात की। इसी दिन न्यायाधीश ने कोर्ट से अवकाश लेने का आवेदन भी दिया था।

रात 9 बजे सौंपी गई फैसले की कॉपी
चार्जशीट में दर्ज टाइम लाइन के अनुसार, आईएएस संतोष वर्मा की विभागीय पदोन्नति (DPC) को हरी झंडी दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं को कथित तौर पर असाधारण गति से आगे बढ़ाया गया।

7 अक्टूबर 2020 की शाम करीब 5:15 बजे कोर्ट की नकल शाखा से आदेश की दो प्रमाणित कॉपी निकाली गईं। उसी रात 9 बजे संतोष वर्मा को उनके रेजिडेंसी क्षेत्र स्थित निवास के पास फैसले की कॉपी सौंप दी गई। 8 अक्टूबर 2020 की सुबह संतोष वर्मा आदेश की कॉपियां लेकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), भोपाल पहुंच गए और अपना आवेदन पेश कर दिया।

क्या था पूरा विवाद और कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला साल 2016 में इंदौर के लसूड़िया थाने में एक महिला द्वारा आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। दरअसल, साल 2020 में संतोष वर्मा की पदोन्नति होनी थी, जिसके लिए इस लंबित मामले का निपटारा होना जरूरी था। एसआईटी का आरोप है कि इसी वजह से केस को जल्द खत्म करने के प्रयास शुरू हुए।

जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी पीड़ित महिला को मिली तो उन्होंने 9 नवंबर 2020 को कोर्ट की विजिलेंस शाखा और जिला न्यायाधीश से शिकायत की। बाद में आरटीआई के जरिए भी जानकारी जुटाई गई।

फर्जी जजमेंट और FIR: विवाद बढ़ने पर एमजी रोड थाने में फर्जी निर्णय (जजमेंट) तैयार करने का मुकदमा दर्ज हुआ। एसआईटी ने जांच के बाद विजेंद्र सिंह रावत और संतोष वर्मा दोनों को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश की।

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