
भोपाल
प्रदेश सरकार में कृषि मंडियों के वर्गीकरण के लिए नियम में संशोधन किया गया है। मंडियों में आने वाली उपज की मात्रा और वार्षिक आय के आधार पर मंडियों की श्रेणी निर्धारित होगी। वार्षिक आवक पहले के तीन वर्ष की औसत आवक के आधार पर तय की जाएगी।
इस तरह होगा श्रेणी का निर्धारण
कृषि विभाग द्वारा संशोधित नियम के अनुसार क श्रेणी में उस मंडी को शामिल किया जाएगा, जिसकी वार्षिक आय 6 करोड़ रुपये से अधिक हो। साथ ही सालभर में उपज ढाई लाख टन से अधिक आई हो।
अब ए क्लास मंडी वह होगी जिसकी वार्षिक आय छह करोड़ रुपयों से अधिक होगी एवं वार्षिक आवक ढाई लाख मीट्रिक टन से अधिक होगी। पहले ए क्लास मंडी के लिये 3 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक प्रतिवर्ष आय होने का प्रावधान था।
इसी प्रकार, बी क्लास मंडी वह होगी जिसकी जिसकी वार्षिक आय तीन करोड़ रुपयों से अधिक किन्तु छह करोड़ रुपये से कम होगी एवं वार्षिक आवक सवा लाख मीट्रिक टन तक होगी। पहले बी क्लास मंडी के लिये 2 करोड़ रुपये से अधिक तथा रुपये 3 करोड़ 50 लाख रुपये तक प्रतिवर्ष आय का प्रावधान था। इसके अलावा, अब सी क्लास मंडी वह होगी जिसकी वार्षिक आय डेढ़ करोड़ रुपयों से अधिक किन्तु तीन करोड़ रुपये से कम होगी एवं वार्षिक आवक पचास हजार मीट्रिक टन से अधिक किन्तु सवा लाख मीट्रिक टन तक होगी। पहले सी क्लास मंडी हेतु 1 करोड़ रुपये से अधिक तथा 2 करोड़ रुपये तक प्रतिवर्ष आय का प्रावधान था।
डी क्लास मंडी वह होगी, जिसकी वार्षिक आय डेढ़ करोड़ रुपयों तक होगी एवं वार्षिक आवक पचास हजार मीट्रिक टन तक होगी। पहले डी क्लास मंडी के लिये 1 करोड़ रुपये तक प्रतिवर्ष आय का प्रावधान था। इस नये प्रावधान में कहा गया है कि यदि वार्षिक आय और आवक के आधार पर मंडी समिति भिन्न-भिन्न वर्गों में वर्गीकृत होती है तो निम्रतर वर्ग मान्य होगा एवं पूर्व में वर्गीकृत कोई भी मंडी समिति इस नये प्रावधान के प्रारंभ होने के परिणामस्वरुप चालू वित्तीय वर्ष के लिये निम्रतर वर्ग में वर्गीकृत नहीं की जायेगी।
इसी तरह 'ख' श्रेणी के लिए वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 6 करोड़ से कम और वार्षिक उपज की आवक 1.25 लाख टन से ज्यादा लेकिन ढाई लाख टन से कम होनी चाहिए।
'ग' श्रेणी में उन मंडियों को रखा गया है, जिनकी वार्षिक आय डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 3 करोड़ रुपये से कम और वार्षिक उपज की आवक 50 हजार टन से अधिक किंतु 1.25 लाख टन से कम हो।
'घ' श्रेणी की मंडियां वे होंगी, जिनकी वार्षिक डेढ़ करोड़ रुपये से कम और उपज की वार्षिक आवक 50 हजार टन से कम हो।






