देश

RBI का बड़ा बयान: UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, जानिए क्या है असली बात

 नई दिल्ली

वित्त मंत्रालय ने संसद में जो भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया है. उस बिल के तहत एमडीआर (MDR) लागू करने की बात कही गई है. यह चार्ज 2000 रुपये से ज्‍यादा की लिमिट पर लागू हो सकता है. ऐसा होता है तो फिर 2000 रुपये से ज्‍यादा के किसी भी एकमुश्त पेमेंट पर ये एमडीआर शुल्क देना होगा। 

लोगों में इसे लेकर हड़कंप मचा है और तमाम सर्वे ये आशंका भी जता रहे हैं कि इस नए यूपीआई नियम (New UPI Rule) के चलते बड़ी संख्या में यूजर्स इससे किनारा कर सकते हैं. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अभी इसे लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा, क्योंकि पेमेंट सिस्टम पर अभी संशोधन पर विचार-विमर्श कर रही हैं। 

Related Articles

'अभी कुछ कहना जल्दबाजी… '
RBI Governor संजय मल्होत्रा का कहना है कि यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के मुद्दे पर अभी जल्दबाजी में कुछ नहीं कहा जा सकता है. भुगतान प्रणाली पर अभी भी विचार-विमर्श जारी है, जिसने कई छोटे-मोटे लेन-देनों के लिए कैश की जरूरत को कम करने में मदद की है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का फोकस UPI को अधिक से अधिक अपनाने पर है. सरकार अभी भी संशोधन कर रही है. संजय मल्होत्रा के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में आने वाली लागत अंततः किसी न किसी को तो चुकानी ही होगी. बुधवार को रेपो रेट पर एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करने के बाद एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये 
बातें कहीं। 

UPI से जुड़े नए विधेयक में क्या-क्या? 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जो उन प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव देता है, जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर एमडीआर लगाने से रोकते हैं. लेकिन यह लिमिट सभी यूजर्स के लिए नहीं है, बल्कि व्‍यवसाय से जुड़ा हुआ मामला है। 

आम यूजर्स पर नहीं होगा असर
जैसा कि बताया ये मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन से जुड़ा मामला है, तो ऐसे में आम यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं देखने को मिलेगा. यानी रोजमर्रा के जरूरी सामानों, दूध, सब्जियां, किराना की खरीदारी और ऑटो रिक्शा व टैक्सी के किराए पर इसका असर दिखने की संभावना नहीं है. हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी भ्रम फैला हुआ है कि कुछ पोस्‍ट में यह दावा किया गया है कि यह सभी यूजर्स पर लागू होगा। 

क्‍या है 2000 रुपये की लिमिट? 
कई रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह प्रस्ताव खासतौर पर ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन और बड़े कमर्शियल संस्‍थानों को टारगेट करता है. इससे कंज्‍यूमर टू कंज्‍यूमर्स के बीच हुए ट्रांजेक्‍शन को छूट होगी. अगर आप 2000 रुपये से ज्‍यादा का भी पेमेंट करते हैं तो आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा. यानी आम यूजर्स पहले की तरह ही ₹2,000 से अधिक का पेमेंट कर सकते हैं. सामान्य UPI सीमा ₹1 लाख प्रतिदिन पेमेंट कर सकते हैं और कुछ स्‍पेशल कैटेगरी (जैसे अस्पताल, शिक्षा, टैक्स) में इससे कहीं अधिक सीमा तक पेमेंट कर सकते हैं। 

क्या होता है MDR चार्ज? 
MDR चार्ज एक ऐसा शुल्क है, जो बिजनेस, डिजिटल ट्रांजेक्शन करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देना होता है. ऐसे में साफ है कि ये चार्ज व्यापारियों पर लागू होगा, न कि आम UPI यूजर पर. यह कदम जनवरी 2020 में शुरू होने वाला था, लेकिन सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इसे रोक दिया था। 

यह किन यूजर्स पर लागू होगा? 
यह मुख्‍य तौर पर बैंक, UPI सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्‍टम, BHIM-UPI के माध्यम से छोटे भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर पड़ता है, क्योंकि इंसेंटिव इन्हीं ट्रांजेक्शनों के आधार पर दिया जाता है. एक आंकड़े के मुताबिक, 95 फीसदी 2000 रुपये से ज्‍यादा की लिमिट से कम वाले ही ट्रांजेक्‍शन होते हैं. सिर्फ 5 फीसदी ही ट्रांजेक्‍शन 2000 रुपये से ज्‍यादा का होता है. इसका मतलब है कि इन 5 फीसदी ही मर्चेंट ट्रांजेक्‍शन पर ये चार्ज लागू होगा। 

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button