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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने एवं नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने में जुटे निखिल सुंदरानी

“तकलीफ-परेशानियां ही मेरी सच्ची गुरु” – निखिल सुंदरानी
रायपुर।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, भक्ति संगीत और पारंपरिक गीतों को संजोने का कार्य कर रहे निखिल सुंदरानी ने चैत्र नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर भजन, गीत एवं संगीत का भव्य प्रसारण किया। उन्होंने इस महापर्व के लिए 40 से अधिक भक्ति गीतों का निर्माण करवाया, जिन्हें निखिल सुंदरानी द्वारा संचालित 13 यूट्यूब चैनलों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए जारी किया जाएगा।
नवोदित कलाकारों को दे रहे मंच
निखिल सुंदरानी न केवल छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि नए और उभरते हुए कलाकारों को भी पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं। इस कड़ी में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सबसे कम उम्र की गायिका आशी चौहान (6 वर्ष, रायगढ़ निवासी) एवं वंगिता साहू (12 वर्ष, बिलासपुर निवासी) को अपनी टीम में शामिल किया। इन बाल प्रतिभाओं ने सुंदरानी स्टूडियो में अपनी प्रस्तुति दी, जिसकी रिकॉर्डिंग करवाई गई और अब इन्हें यूट्यूब पर प्रसारित किया जाएगा।
परिवार की सांगीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
निखिल सुंदरानी महज 12 वर्ष की आयु से ही अपने दादा मोहन सुंदरानी जी से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत की सेवा में जुटे हुए हैं। जिन्हें छत्तीसगढ़ के भीष्म पितामह के नाम से जाना जाता है, उन्होंने लोकसंगीत को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने दादा जी की इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए निखिल सुंदरानी ने मात्र 16 वर्ष की आयु से छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत, सतनाम भजन, कर्मा माता, निषाद समाज के राजा की कथा एवं भक्ति संगीत का निर्माण कर यूट्यूब पर प्रसारित करना शुरू किया।
चैत्र नवरात्रि पर्व पर भक्ति संगीत की अनूठी प्रस्तुति
इस वर्ष के चैत्र नवरात्रि पर्व के लिए निखिल सुंदरानी ने लोकभक्ति संगीत की 40 से अधिक रचनाओं का निर्माण करवाया। इन गीतों को प्रसिद्ध गायक दुलालू यादव, चंपा निषाद, रानू निषाद एवं अन्य युवा कलाकारों की आवाज़ में रिकॉर्ड करवाया गया है। इन सभी भक्ति गीतों को निखिल सुंदरानी द्वारा संचालित 13 यूट्यूब चैनलों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए जारी किया जाएगा।
संघर्षों को गुरु मानते हैं निखिल सुंदरानी
छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने के इस सफर में निखिल सुंदरानी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि “तकलीफ-परेशानियां ही मेरी सच्ची गुरु हैं, क्योंकि ये मुझे सीखने का अवसर देती हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।”
संस्कृति और संगीत की अनूठी साधना
निखिल सुंदरानी का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल मंच प्रदान करना और नई प्रतिभाओं को देश-दुनिया के सामने लाना है। उनकी यह पहल लोकगायकों एवं संगीत साधकों के लिए एक सशक्त मंच साबित हो रही है। उनका यह योगदान निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी संगीत और संस्कृति को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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