मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में मल्टीस्टोरी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को मिलेगी मंजूरी, 25 एकड़ जमीन की शर्त हटेगी

भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार की रविवार को जगदीशपुर में होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में कई अहम विधेयकों पर फैसला हो सकता है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी), निजी विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थान, फायर सेफ्टी, उद्योग और श्रम कानूनों समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद इन्हें मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। 

निजी विश्वविद्यालय खोलना होगा आसान
सरकार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन के तहत विश्वविद्यालय खोलने के लिए 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये के एंडोमेंट फंड की अनिवार्य शर्त समाप्त की जा सकती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार कोई भी संस्था निजी विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहती है तो उसे सोसायटी पंजीयन अधिनियम, 1860 की धारा-8 के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। इसके साथ ही संस्था के पास विवादमुक्त 25 से 50 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये का एंडोमेंट फंड होना अनिवार्य है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विधानसभा में अलग से विधेयक पारित कराया जाता है। विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय की स्थापना हो सकती है। सरकार अब भूमि और एंडोमेंट फंड की अनिवार्यता समाप्त करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इससे निजी क्षेत्र की अधिक संस्थाएं विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए आगे आएंगी। इससे प्रदेश में मल्टीस्टोरी प्राइवेट यूनिवर्सिटी खुल सकेंगी। इस संशोधन पर भी कैबिनेट की मुहर लग सकती है।

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कोचिंग संस्थानों पर आएंगे नए नियम
निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। यानी सामान्य तौर पर 11वीं कक्षा से पहले प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई, बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित समय सीमा में अनुपातिक आधार पर फीस लौटाने और नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान प्रस्तावित है। 

फायर सेफ्टी कानून होगा सख्त
सरकार मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026 लाने जा रही है। इसके तहत 15 मीटर या उससे अधिक ऊंची बहुमंजिला इमारतों, 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों, 15 या उससे अधिक कमरों वाले होटलों, 50 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों, मॉल और अन्य बड़े व्यावसायिक परिसरों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। साथ ही नगरीय निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स के साथ फायर सेफ्टी टैक्स लगाने और नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का भी प्रावधान किया जाएगा।

उद्योगों को एक ही जगह मिलेंगी मंजूरियां
औद्योगिक निवेश की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआईडीसी) में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सचिवालय बनाने का प्रस्ताव है। यहां विभिन्न विभागों की मंजूरियां सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया तेज होगी। प्रस्ताव के अनुसार कुछ श्रेणी के उद्योगों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की पूर्व अनुमति की अनिवार्यता भी समाप्त की जा सकती है।  

इन विधेयकों पर भी लग सकती है मुहर
श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव: केंद्र की नई श्रम संहिताओं के अनुरूप राज्य के छह पुराने श्रम कानून समाप्त कर एकीकृत कानून लागू किया जाएगा। थिएटर, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन, तीन शिफ्ट में काम की व्यवस्था तथा नए प्रतिष्ठानों के पंजीयन में इंस्पेक्टर सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव है।

मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026: राज्य राजमार्गों पर अवैध कट, अनधिकृत पहुंच मार्ग और अतिक्रमण रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाया जाएगा।

मप्र नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अनुरूप न्यायिक और पुलिस जांच प्रक्रिया को डिजिटल बनाने तथा नई प्रक्रियाओं को लागू करने का प्रावधान।

मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026: स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री पर लगने वाले 1% जनपद उपकर से छूट देने का प्रावधान।

मप्र उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026: स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री पर लगने वाले 0.5% उपकर से भी छूट का प्रावधान।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक: कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसके प्रमुख प्रावधानों की जानकारी सरकार और यूसीसी समिति पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है।
  

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