उत्तर प्रदेश

‘संस्कृति-आधारित सुशासन’ का नया ब्लूप्रिंट बना माघमेला

प्रयागराज.

संगम तट आयोजित माघ मेला 2026 ने अब तक के अपने सभी माघ मेलों के आयोजन को पीछे छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता और सतत निगरानी के चलते इसे मिनी कुंभ जैसी पहचान ही हासिल नहीं हुई बल्कि संस्कृति,  सुशासन, सामाजिक समरसता और आत्मानुशासन की अभिव्यक्ति का यह अद्भुत समागम बन गया। 

 भारत की ‘संस्कृति-आधारित सुशासन’

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संगम नगरी प्रयागराज में पावन त्रिवेणी के तट पर आयोजित माघ मेला 2026 भारत की संस्कृति पर आधारित गवर्नेंस का ऐसा ब्लू प्रिंट बन रहा है जिसका अन्य कहीं कोई उदाहरण देखने को नहीं मिलता। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ 3 जनवरी से शुरू हुए इस आयोजन के पांच प्रमुख स्नान पर्व सकुशल संपन्न हो जाने के बाद यहां 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पावन गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में पुण्य की डुबकी लगाकर अपना संकल्प पूरा कर चुके हैं। अभी आखिरी स्नान पर्व महा शिवरात्रि शेष है। मेला प्रशासन 15 फरवरी को इसके सकुशल समापन की तैयारी में लगा है। पूर्ण अनुशासन के साथ आस्था का जन सैलाब यहां आया और सनातन की बयार की झलक दिखाकर आगे बढ़ गया। 

सामाजिक समरसता, प्रकृति संतुलन और आत्मानुशासन का पर्याय कल्पवास
 
कुंभ और महाकुंभ को यदि सनातन के 13 अखाड़ों के वैभव का महा आयोजन माना जाता है तो माघ मेला त्रिवेणी की रेती पर एक महीने तक प्रवास करने वाले कल्पवासियों का समागम। इस बार 5 लाख से अधिक कल्पवासियों ने यहां कल्पवास किया जिन्हें प्रशासन की तरफ से हर तरह की सहूलियत मिली। कल्पवासियों को तीर्थ पुरोहित ही अपने तंबुओं से बने शिविरों में बसाते हैं। पहली बार तीर्थ पुरोहितों के लिए अलग से प्रयागवाल नगर बसाया गया। सभी तरह के जाति,  उप-जाति का भेद भुलाकर मां गंगा के पावन जल में स्नान कर इन कल्पवासियों ने अपने संकल्प पूर्ण किए।

भीड़ प्रबंधन में दिखा प्रशासन का कौशल, मेला सेवा ऐप बना सारथी

माघ मेले के अब तक के इतिहास में इस बार का माघ मेला सबसे अधिक विस्तारित क्षेत्र में बसाया गया। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार माघ मेले का इस बार 800 हेक्टेयर तक विस्तार किया गया। मेला क्षेत्र में पहली बार सात सेक्टर और 9 पांटून पुल बनवाए गए। आवागमन सुगम बनाने के लिए मेला क्षेत्र में पहली बार गोल्फ कार्ट सेवा की शुरुआत हुई। बसंत पंचमी तक 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। इसके अलावा शहर के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र पहुंचाने के लिए बाइक टैक्सी सेवा शुरू की गई। माघ पूर्णिमा तक 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इसकी सेवा ली। श्रद्धालुओं की सहूलियत की लिए पहली बार मेला सेवा ऐप का निर्माण किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए 42 पार्किंग बनाई गई। माघ मेला में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 15 हजार से अधिक पुलिस कर्मी तैनात रहे, मेला क्षेत्र में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के अलावा ड्रोन के जरिए भीड़ की सतत निगरानी होती रही।

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