Breaking Newsमध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश UCC का बड़ा असर! लिव-इन रिलेशनशिप के लिए होंगे सख्त नियम, जानें रजिस्ट्रेशन से अलग होने तक पूरी प्रक्रिया

भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा लगभग तैयार हो गया है. इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई नए नियम शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लिव-इन में रहने वाले कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, इस रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया भी शादी और तलाक की तरह तय की जाएगी। 

मसौदे के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराया है और वह बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपना लिव-इन रजिस्ट्रेशन रद्द कराना होगा. रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी नहीं होगी. एक पक्ष भी आवेदन देकर इसे निरस्त करा सकेगा. हालांकि, दूसरा पक्ष इस फैसले से असहमत होने पर अदालत में चुनौती दे सकता है। 

Related Articles

सरकार और विधि विभाग मसौदे को अंतिम रूप दे चुके हैं. अब गुरुवार को दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ अंतिम चर्चा होगी. इसके बाद सरकार मानसून सेशन में यूसीसी विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

पहले क्या थे प्रावधान?
ड्राफ्ट में उत्तराधिकार (संपत्ति के अधिकार) से जुड़े प्रावधानों को भी पहले के मुकाबले काफी कम किया गया है. पहले जहां ऐसे करीब 100 प्रावधान थे, अब उन्हें घटाकर लगभग 30 कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों के बाद मध्य प्रदेश की यूसीसी, गुजरात और उत्तराखंड की यूसीसी से अधिक सरल और संक्षिप्त होगी. आदिवासी, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को पहले की तरह इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 

मसौदे के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन केवल बालिग (18 साल या उससे अधिक उम्र) लोग ही करा सकेंगे. इसके लिए दोनों पक्षों को अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे. रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास होगा। 

लिव-इन को लेकर प्रावधान
अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी के साथ लिव-इन में रह रहा है और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नया रजिस्ट्रेशन कराता है, तो ऐसी स्थिति की जानकारी रखने की व्यवस्था फिलहाल साफ नहीं है. इसलिए इस प्रावधान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। 

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उसके खिलाफ अलग से कोई आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं होगा. यह व्यवस्था काफी हद तक लोगों की जागरूकता और आपसी सहमति पर आधारित रहेगी. वहीं, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन में रहता है, तो ऐसे मामलों में पहले से लागू आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। 

सूत्रों के मुताबिक, अगर यह विधेयक मानसून सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कुछ प्रावधानों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है। 

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button