
नई दिल्ली
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिना समय बर्बाद किए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया है। परीक्षा सुधारों पर टास्क फोर्स बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए कदमों को देखकर बहुत खुशी हुई। बेदी ने कहा कि नंदन नीलेकणि इस काम के लिए बहुत सम्मानित और विश्वसनीय व्यक्ति हैं। हम उनसे राष्ट्रीय हित में बड़े बदलाव की उम्मीद करते हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के धरना-प्रदर्शन पर बारीक नजर रख रही हैं। इससे पहले भी बेदी ने इस मुद्दे पर अपने विचार और सलाह शेयर किए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा मंत्रालय अब एक नई शुरुआत कर सकता है। ये ऐसा मौका है जिसे हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। उन सभी चीजों की पहचान करें जिन्हें सही करने और बदलने की जरूरत है। लीडरशिप के लिए साफ संदेश है कि वे बात सुनने और सुधार करने के लिए हमेशा तैयार रहें। बेदी ने कहा कि कहा कि लोगों की जरूरतों और उम्मीदों को लेकर संवेदनशील रहने की जरूरत है। खासकर युवाओं के प्रति यह और जरूरी है क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि हर तरह से असरदार और संवेदनशील गवर्नेंस पर फोकस करें। एक भी दिन बर्बाद नहीं करना है।
देश को रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत
किरण बेदी ने कहा कि अब संसद की ओर देश उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। उम्मीद है कि बहसें राजनीति से ऊपर उठकर व्यावहारिक समाधान देंगी। हम ऐसी रणनीतियों को सुनने के लिए उत्सुक हैं जो समाज के सभी वर्गों में भरोसा जगाएं। साथ ही मौजूदा सरकार के सामने मौजूद अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करें। देश को रचनात्मक नेतृत्व की जरूरत है।
हिंसा से बचाना चाहिए
इससे पहले बेदी ने ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को एक सलाह भी दी थी। बेदी ने कहा था कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को तैनात करना चाहिए। कहा कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स सुरक्षा की पहली पंक्ति हो सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे सीमा पर बीएसएफ होती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक उपायों के साथ बिना लाठी-डंडे के इन वॉलंटियर्स को छात्र प्रदर्शनकारियों का सामना करना चाहिए। इसके अलावा दंगा-रोधी पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना चाहिए।
दिल्ली में काम कर चुकीं बेदी ने सुझाव दिया कि हर राज्य में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स या होम गार्ड होते हैं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से पैदा होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए उनके जवानों को बेहतर ट्रेनिंग दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दंगा-रोधी पुलिस को तभी कार्रवाई करनी चाहिए जब सिविल डिफेंस की लाइन टूट रही हो या उस पर कोई खतरा हो।






