मध्यप्रदेश

हर तीन माह में अर्जित ब्याज को अब सरकारी खजाने में करना होगा जमा

भोपाल

प्रदेश के निगम-मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण सहित अन्य समिति पहले अपने बजट की राशि कोषालय से निकाल संस्थाओं के बैंक खातों में जमा कर हर साल ब्याज से कमाई कर लेती थी, लेकिन अब इस पर रोक लग जाएगी। अब हर तीन माह में इस ब्याज राशि को खजाने में जमा करना होगा। इधर, प्रदेश में जलाशय, बांध से जुड़े बड़े कामों में तेजी आएगी। सरकार ने जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की खर्च सीमा बढ़ा दी है।

प्रदेश के सरकारी विभागों के अंतर्गत आने वाले संस्थान, निगम-मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण, अभिकरण, परिषद, काउंसिल, अकादमी, सहकारी समिति और अन्य समितियां  और सरकारी महकमों के निर्माण कार्यो को अंजाम देने वाली निजी एजेंसियां हर साल जारी बजट में मिली राशि को कोषालय से निकालने के बाद संस्थाओं के बैंक खातों में जमा कर खर्च न होने वाली राशि पर हर साल मिलने वाली भारी भरकम ब्याज से कमाई नहीं कर सकेंगे। हर तीन माह में इस ब्याज की राशि को अब शासकीय खजाने में जमा करना होगा।

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वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों तथा सभी विभागाध्यक्ष और बजट नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश जारी कर राज्य सरकार के संस्थानों के बैंक खातों और राज्य शासन की ओर से निर्माण कार्यो में संलग्न क्रियान्वयन एजेंसियों के पास जमा राशि पर अर्जित ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा कराए जाने के निर्देश दिए है। वित्त विभाग ने इस प्रकार के अर्जित ब्याज को हर तिमाही में शासकीय खजाने में जमा कराये जाने का निर्णय लिया है। संस्थानों द्वारा अर्जित ब्याज की राशि को हर तिमाही के बाद आगामी माह की पांच तारीख के पूर्व राज्य की संचित निधि में सायबर कोषालय के माध्यम से जमा कराने के निर्देश उन्होंने दिए है। जमा ब्याज राशि के संबंध में माह की पंद्रह तारीख तक प्रशासकीय विभाग के माध्यम से वित्त विभाग को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए है।

यह भी दिए निर्देश

राज्य में संचालित केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं, केन्द्र क्षेत्रीय योजनाओं के लिए खोले गए  एसएनए, सीएनए बैंक खातों में अर्जित ब्याज को केन्द्र और राज्य की संचित निधि में समानुपातिक रुप से जमा कराये जाने हेतु समय-समय पर भारत सरकार से जारी निर्देर्शो का पालन करने के निर्देश भी दिए गए है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं में राज्यांश की राशि पर अर्जित ब्याज को भी भारत सरकार के निर्देशों के अनुरुप केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए खोले गए सिंगल नोडल एजेंसी के बैंक खातों में जमा राशि पर अर्जित ब्याज सायबर कोषालय के माध्यम से जमा कराए जाने के निर्देश भी दिए गए है।

जलसंसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास के लिए  बढ़ाई खर्च सीमा, एक हजार करोड़ से ज्यादा करेंगे खर्च

राज्य सरकार ने मतदान और मतगणना के बीच नवंबर माह में जलसंसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए इस माह में खर्च की सीमा बढ़ा दी है दोनो विभाग एक हजार करोड़ से ज्यादा राशि इस माह खर्च कर सकेंगे।

सभी विभाग वित्त विभाग द्वारा जारी बजट का अनियंत्रित उपयोग नहीं करे इसलिए वित्त विभाग ने हर तिमाही के लिए खर्च सीमा तय कर रखी है। लेकिन इस बीच प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे है और इन विभागों के पहले से स्वीकृत कामों को पूरा करने में धन की कमी हो रही थी।  ठेकेदारों ने कई जगह काम करना बंद कर दिया था। इनके भुगतान समय पर हो सके और निर्माण कार्य बाधित न हो सके इसलिए वित्त विभाग ने चुनाव आयोग से स्वीकृति लेने के बाद जसंसाधन विभाग की नवंबर माह के लिए खर्च सीमा पुनरीक्षित करते हुए विशेष मासिक व्यय सीमा निर्धारित की है। विभाग अब इस माह 550 करोड़ रुपए खर्च कर सकेगा। वहीं नर्मदा घाटी विकास विभाग इस माह के अंत तक 502 करोड़ रुपए खर्च कर सकेंगे। दोनो विभागों में जलाशय, बांध, नहरों से जुड़े पूंजीगत काम बड़ी संख्या में पूरे प्रदेश में हो रहे है। अतिरिक्त खर्च सीमा तय हो जाने के बाद यहां के कामकाज तेजी से पूरे हो सकेंगे।

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