मध्यप्रदेश

पर्यावरणीय मंजूरी नियमों में बदलाव, 45 दिन में ‘सिया’ ने नहीं दी प्रतिक्रिया तो मुख्य सचिव करेंगे निर्णय

भोपाल
 खदान, सड़क निर्माण या अन्य परियोजनाएं हों, इनकी पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके प्रभावी होने पर यदि किसी परियोजना को राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) 45 दिन तक स्वीकृति नहीं देती है तो राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस पर निर्णय करेगी। इसमें प्रमुख सचिव, पर्यावरण और प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास सदस्य होंगे।

इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप की अधिसूचना जारी कर सुझाव मांगे हैं। अभी ऐसी व्यवस्था है कि यदि 45 दिन तक सिया की स्वीकृति नहीं मिलती तो परियोजना अपने आप स्वीकृत मानी जाती है। मध्य प्रदेश में भी वर्ष 2025 में ऐसा मामला सामने आ चुका है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सभी राज्यों में सिया है। वहां भी ऐसे मामले हो सकते हैं।

इसी कारण केंद्र सरकार नियम बदलने जा रही है। अपने आप अनुमति मिलने की व्यवस्था में कमी यह है कि बिना मूल्यांकन के परियोजनाएं स्वीकृत होने पर उन्हें भी अनुमति मिल जाती है, जिन्हें पात्रता नहीं होती। यानी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शर्तों के अनुरूप नहीं होतीं।

Related Articles

सामान्यत: 45 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने का बड़ा कारण सिया की बैठक नहीं होना है। नई व्यवस्था में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति मिल पाएगी। इससे विवाद या पक्षपात की स्थिति भी नहीं बनेगी। अभी कई बार यह आरोप लगता है कि 45 दिन तक जानबूझकर बैठकें नहीं की जातीं, जिससे बिना मूल्यांकन अनुमति मिल सके।

 

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button