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8 अक्टूबर का इतिहासः रॉयल इंडियन एयरफोर्स की स्थापना की गवाह है यह तारीख

देश-दुनिया। 08 अक्टूबर की तारीख कई अहम वजहों से दर्ज है। भारतीय वायुसेना के लिए यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। अविभाजित भारत में 08 अक्टूबर 1932 को ही रॉयल इंडियन एयरफोर्स की स्थापना हुई थी। तब यह औपनिवेशिक शासन के अधीन थी। इसी तारीख को भारत में वायुसेना दिवस के तौर पर हर साल मनाया जाता है। यह सबसे बड़ा उत्सव होता है। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित इसका हिंडन वायुसेना स्टेशन एशिया में सबसे बड़ा है। इसका ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ है। इसके मायने हैं-‘गर्व के साथ आकाश को छूना।’ नीला, आसमानी नीला और सफेद इसके रंग हैं। यह भगवद गीता के 11 वें अध्याय से लिया गया है।

द्वितीय विश्व युद्ध में इसके योगदान के लिए ‘रायल’ प्रीफिक्स से नवाजा गया। 1950 में भारत के गणतंत्र बनने पर प्रीफिक्स को हटा दिया गया। भारतीय वायुसेना को आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम की रायल एयरफोर्स में एक सहायक बल के रूप में स्थापित किया गया था। 1947 में स्वतंत्रता के बाद से वायुसेना दिवस को नई दिल्ली के पालम में कार्यक्रमों, परेडों और एक फ्लाईपास्ट से चिह्नित किया गया है। पिछले करीब डेढ़ दशक से देश की राजधानी में ट्रैफिक की बढ़ती समस्या के चलते इस इवेंट्स को हिंडन एयर बेस में शिफ्ट कर दिया गया।

पहली बार इसने 01 अप्रैल 1933 को उड़ान भरी थी। इसके पहले दस्ते में 6 आरएएफ ट्रेंड ऑफिसर और 19 एयर सोल्जर शामिल थे। पहला ऑपरेशन वजीरिस्तान में कबाइलियों के खिलाफ था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसका विस्तार किया गया। भारतीय वायुसेना की जिम्मेदारी भारत को सभी संभावित खतरों से बचाना है और साथ ही आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों में मदद करना है। वायुसेना कई युद्धों में शामिल रही है। इसमें है दूसरा विश्वयुद्ध, भारत-चीन युद्ध, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन विजय, करगिल युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्ध, कॉन्गो संकट।

फंक्शनल कमांड की जिम्मेदारी युद्ध के लिए तैयार
आज वायुसेना पांच ऑपरेशनल और दो फंक्शनल कमांड्स में विभाजित है। हर कमांड का नेतृत्व एयर मार्शल रैंक के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ करते हैं। ऑपरेशनल कमांड का उद्देश्य जिम्मेदारी के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करते हुए मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देना है। फंक्शनल कमांड की जिम्मेदारी युद्ध के लिए तैयार रहने की है।

इसके साथ ही स्वीडन में आर्ने लार्सन को 08 अक्टूबर, 1952 को इंटरनल पेसमेकर लगाया गया था। यह दुनिया का पहला इंटरनल पेसमेकर इम्प्लांट था। तीन घंटे में इसने काम करना बंद कर दिया था। अगले दिन फिर सर्जरी करनी पड़ी थी। लार्सन 2001 तक जीवित रहे और उनकी कई सर्जरी हुईं। और 8 अक्टूबर, 1919 को ही पहली बार ट्रांसकॉन्टिनेंटल एयर रेस शुरू हुई थी। इसमें सैन फ्रांसिस्को से 15 और न्यूयॉर्क से 48 मिलाकर कुल 63 एयरप्लेन शामिल हुए थे। इन विमानों को 5,400 मील का राउंड-ट्रिप पूरा करना था। लेफ्टिनेंट बेल्विन मैनार्ड तीन दिन 21 घंटों में न्यूयॉर्क लौटे थे और उन्होंने यह चैम्पियनशिप जीती थी। यह तारीख इतिहास में धनपत राय श्रीवास्तव यानी मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि के तौर पर दर्ज है। हिन्दी और उर्दू के महानतम लेखकों में शुमार मुंशी प्रेमचंद को शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखने वाले प्रेमचंद का लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है, जो हिन्दी के विकास की यात्रा को संपूर्णता प्रदान करती है।

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