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FMGE उम्मीदवारों के लिए बड़ा अपडेट: पासिंग मार्क्स में राहत देने से साफ इनकार

नई दिल्ली

विदेश से MBBS की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भारत में प्रैक्टिस के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना जरूरी होता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इस परीक्षा का रिजल्ट काफी हैरान करने वाला रहा है. इस परीक्षा में बैठने वाले आधे उम्मीदवार भी पास नहीं हो पाते हैं, जिसके चलते उन्हें डॉक्टरी करने की इजाजत नहीं मिल पाती है. इसे लेकर पिछले कई महीनों से विरोध हो रहा है, इसी बीच परीक्षा आयोजित करने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने कट-ऑफ में किसी भी तरह की छूट से साफ इनकार कर दिया है. हालांकि दो की बजाय साल में तीन बार परीक्षा पर विचार किया जा रहा है। 

मानकों से नहीं होगा कोई समझौता
सूत्रों के अनुसार, NBEMS ने कहा है कि FMG छात्रों की जायज मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन डॉक्टर बनने के लिए जरूरी न्यूनतम योग्यता के मानकों से समझौता नहीं होगा. जून 2026 के FMGE को लेकर छात्रों के विरोध के बीच NBEMS की एक्सपर्ट कमेटी ने परीक्षा को ज्यादा पारदर्शी और छात्रों के लिए आसान बनाने के सुझाव दिए हैं। 

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समिति ने सुझाव दिया है कि FMGE साल में 3 बार कराने की संभावना पर विचार किया जाए. इसके अलावा परीक्षा फीस की समीक्षा और परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं में सुधार की बात कही गई है. छात्रों को परीक्षा में दिए गए अपने रिकॉर्डेड जवाब देखने की सुविधा देने का भी सुझाव है, लेकिन तकनीकी और कानूनी सुरक्षा के साथ. जून की परीक्षा में ग्रेस या अतिरिक्त अंक देने की सिफारिश नहीं की गई है. समिति को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि वीडियो वाले सवालों या पेपर की कठिनाई ने परीक्षा के नतीजे को प्रभावित किया। 

पास प्रतिशत के आंकड़े

    जून 2026 में पहली बार परीक्षा देने वाले 35.74% छात्र पास हुए.
    दूसरी बार परीक्षा देने वालों में 21.45% पास हुए.
    5 से ज्यादा बार परीक्षा दे चुके छात्रों में सिर्फ 3.29% पास हुए
    दिसंबर 2025 में पहली बार परीक्षा देने वालों का पास प्रतिशत 47.53% था, जबकि 5 से ज्यादा बार परीक्षा देने वालों में यह सिर्फ 5.58% रहा.

NBEMS का तर्क
NBEMS का कहना है कि सिर्फ कुल पास प्रतिशत देखकर ये नहीं कहा जा सकता कि पूरा पेपर गलत या अन्यायपूर्ण था. FMGE कोई प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा नहीं है. ये विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों की भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा है. न्यूनतम योग्यता इसलिए जरूरी है, क्योंकि डॉक्टरों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सेप्सिस, जटिल गर्भावस्था और बच्चों की इमरजेंसी जैसी गंभीर स्थितियों को संभालना पड़ सकता है। 

पेपर को लेकर सुझाव
एक्सपर्ट कमेटी ने सवालों की कठिनाई का संतुलन रखने का सुझाव दिया है. इसमें 30% आसान सवाल, 50% मध्यम स्तर के सवाल, 20% कठिन सवाल, पेपर की औसत कठिनाई 5.5 से ज्यादा न हो, ये तमाम सुझाव दिए गए हैं। 

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