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तालिबान सरकार के फैसले से विवाद, मौलाना–मौलवी को कानूनी छूट पर सवाल

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तालिबान का नया नियम: मौलाना–मौलवी पर नहीं चलेगा मुकदमा, फैसले पर मचा बवाल

अफगानिस्तान में तालिबानी प्रशासन ने अपनी अदालतों के लिए एक निर्देश जारी कर दिया है जिसको लेकर बवाल शुरू हो गया है। अफगानिस्तान की सरकार ने 'क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट' के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा है कि देश में मुल्ला और मौलवियों पर केस नहीं चलाए जाएंगे।इसके अलावा इस कोड के आर्टिकल 9 के तहत अफगान सोसाइटी को चार वर्गों में बांट दिया गया है। इसमें सबसे ऊपर मुल्ला और मौलवी होंगे। इस निर्देश में कहा गया है कि मुस्लिम धर्म गुरु अगर कोई भी अपराध करते हैं तो उनपर मुकदमा नहीं दर्ज किया जाएगा।

वहीं अगर अन्य कैटिगरी के लोगों के खिलाफ अपराध साबित होता है तो उन्हें कड़ा दंड मिलेगा। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग वर्गों के लोगों को अलग-अलग दंड भी दिया जाएगा। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर देवबंदी इस्लामिक नाम के अकाउंट से कहा गया कि तालिबान प्रशासन ने चतुर्वर्ण व्यवस्था लागू कर दी है।

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नशनल रजिस्टेंस फ्रंट की मीडिया सेल ने कहा कि तालिबान ने गुलमी को कानूनी बना दिया है। अब कोर्ट अलग-अलग लोगों को स्टेटस के हिसाब से सजा सुनाएगी। ऐसे में उच्च वर्ग वालों की सुरक्षा की जाएगी और गरीबों को सजा दी जाएगी। बता दें कि तालिबान प्रशासन पहले ही भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचार के लिए बदनाम था। पहली बार जब अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ था तब भी इस तरह के नियम लगाए गए थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद एक बार फिर से इसपर चर्चा होने लगी।

बता दें कि लगभग एक महीने पहले एक 13 साल के किशोर को परिवार के 13 सदस्यों की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई थी। उसकी मौत की सजा के लगभग 80 हजार लोग गवाह बने थे। तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।

 

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