मध्यप्रदेश

भोजशाला मामला : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नहीं सुना सकता कोई फैसला, भोजशाला मामले में फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा हिंदू पक्ष

इंदौर
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में अब हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी कर ली है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वेक्षण रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत की जा चुकी है। हिंदू पक्ष इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह मांग करेगा कि वह अपने एक अप्रैल, 2024 को दिए आदेश को निरस्त करे।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को किया था मना
इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा था कि वह एएसआई के सर्वेक्षण के परिणाम के आधार पर कोई कार्रवाई न करे। हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हमने तैयारी कर ली है। संभवत: एक-दो दिन में इस याचिका को दायर कर देंगे।

मुस्लिम पक्ष ने दिया था ये तर्क
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 11 मार्च, 2024 को एएसआई को आदेश दिया था कि वह काशी स्थित ज्ञानवापी की तर्ज पर धार स्थित भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस आदेश को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की थी। मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि भोजशाला का एक सर्वे वर्ष 1901-02 के दौरान हो चुका है, इसलिए अब नए सिरे से सर्वे की आवश्यकता नहीं है इसलिए ताजा सर्वे (वर्ष 2024) पर रोक लगाई जाए।

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हाई कोर्ट में एएसआई की सर्वे रिपोर्ट
याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल, 2024 को आदेश जारी कर कहा था कि सर्वे तो जारी रहेगा, लेकिन इस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना सकेगी। अब 15 जुलाई को एएसआई की रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत हो चुकी है, ऐसे में हिंदू पक्ष चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट अपने उस आदेश को निरस्त कर दे, जिसमें कहा था कि हाई कोर्ट सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई न करे। बता दें, एएसआई द्वारा संरक्षित 11वीं सदी में बनी भोजशाला को हिंदू और मुस्लिम पक्ष इस पर अपना-अपना दावा जताते हैं। हिंदू इसे वाग्देवी (सरस्वती देवी) का मंदिर मानते हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद बताता है।

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