बिहार

बरौनी रिफाइनरी ने बदली तस्वीर, निर्यात का केंद्र बना बेगूसराय

पटना
उद्योग और निर्यात के राष्ट्रीय मानचित्र पर बिहार की मौजूदगी अभी भी सीमित है। सरकारी सहयोग व्यवस्था की जटिलताओं में उलझा है, जबकि उद्यमियों के प्रयास भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाए हैं। भौगोलिक और परिवेशजनित चुनौतियां भी राज्य की राह में बाधा बनी हुई हैं।

इसी कारण देश के कुल निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी आधा प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ पा रही है। पिछले करीब एक दशक से स्थिति लगभग यही बनी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि बिहार की इस सीमित हिस्सेदारी में भी आधे से अधिक योगदान अकेले बेगूसराय जिले का है।

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बरौनी रिफाइनरी ने बनाया बेगूसराय को निर्यात का केंद्र
बेगूसराय की औद्योगिक पहचान बरौनी रिफाइनरी, एनटीपीसी पावर प्लांट और बरौनी डेयरी से जुड़ी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार से हुए कुल निर्यात में इस जिले की हिस्सेदारी 53.08 प्रतिशत रही।

इस प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा योगदान पेट्रो उत्पादों का रहा, जिन्हें बरौनी रिफाइनरी से नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को भेजा गया। यही वजह है कि बेगूसराय बिहार के निर्यात तंत्र का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।

पूर्वी चंपारण दूसरे, अररिया तीसरे स्थान पर
बिहार के कुल निर्यात में 11.26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पूर्वी चंपारण दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद 8.51 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अररिया तीसरे स्थान पर रहा।

पटना (5.53 प्रतिशत), नालंदा (5.09 प्रतिशत), किशनगंज (5.04 प्रतिशत), सारण (3.54 प्रतिशत), सीतामढ़ी (2.18 प्रतिशत), पूर्णिया (1.27 प्रतिशत) और कटिहार (0.62 प्रतिशत) भी प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल रहे।

सीमांचल के चारों जिले टॉप-10 में शामिल
राज्य के कुल निर्यात में शीर्ष 10 जिलों की हिस्सेदारी 96.12 प्रतिशत रही है। खास बात यह है कि सीमांचल क्षेत्र के सभी चार जिले — अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार — इस सूची में शामिल हैं।

यह संकेत देता है कि सीमांचल क्षेत्र धीरे-धीरे बिहार के निर्यात परिदृश्य में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

2025-26 में बिहार से 18,713 करोड़ रुपये का निर्यात
वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार से कुल 18,713.10 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हुआ। वहीं इसी अवधि में देश का कुल निर्यात 39,03,730.60 करोड़ रुपये रहा।

इसके आधार पर राष्ट्रीय निर्यात में बिहार की हिस्सेदारी अभी भी आधा प्रतिशत से कम बनी हुई है, जो राज्य के लिए चिंता और संभावनाओं दोनों का संकेत है।

पेट्रो उत्पादों का रहा सबसे बड़ा योगदान
बिहार के कुल निर्यात में पेट्रो उत्पादों की हिस्सेदारी 55.48 प्रतिशत रही। इसमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल और केरोसीन जैसे उत्पाद प्रमुख रहे।

इसके बाद 10.18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मांस उत्पाद दूसरे स्थान पर रहे। कृषि निर्यात में गैर-बासमती चावल और मक्का महत्वपूर्ण रहे, जिनकी हिस्सेदारी क्रमशः 6.63 और 4.01 प्रतिशत रही।

नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंच रहे कृषि उत्पाद
बिहार से गेहूं का भी निर्यात वैश्विक बाजारों, विशेषकर नेपाल और बांग्लादेश, तक किया जा रहा है। कृषि आधारित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

हालांकि राज्य की क्षमता के मुकाबले कृषि निर्यात का स्तर अभी भी काफी कम माना जा रहा है।

लीची, मखाना और सिल्क की मौजूदगी, लेकिन मात्रा कम
मुजफ्फरपुर की लीची, सहरसा और दरभंगा का मखाना तथा भागलपुर का सिल्क और जूट भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके इन उत्पादों का निर्यात अभी सीमित स्तर पर है।

कुल निर्यात में सब्जियों की हिस्सेदारी 1.37 प्रतिशत और फलों की हिस्सेदारी केवल 0.96 प्रतिशत रही, जो राज्य की कृषि क्षमता के मुकाबले बेहद कम है।

दवाइयों और रेलवे उपकरणों का भी बढ़ रहा निर्यात
राज्य से दवाइयों और बायोलॉजिकल उत्पादों का निर्यात 2.01 प्रतिशत रहा। वहीं ग्रेफाइट और अन्य खनिज आधारित उत्पादों की हिस्सेदारी 5.03 प्रतिशत दर्ज की गई।

रेलवे ट्रांसपोर्ट उपकरणों का निर्यात भी 3.48 प्रतिशत रहा, जो बिहार के औद्योगिक निर्यात में उभरते क्षेत्रों की ओर इशारा करता है।

 

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