देश

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जों पर सरकार से मांगा जवाब, अफसरों की भूमिका पर उठाए कड़े सवाल

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली- लखनऊ में हुए हालिया अग्निकांड की घटनाओं को लेकर कड़ा रख अपनाते हुए नगर निकायों को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में अवैध कब्जों को लेकर भी नाराजगी जताई और पूछा कि अवैध कब्जों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? अदालत ने नगर निकायों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करेगा। 

नगर निकाय के अधिकारियों को लगाई फटकार
कोर्ट ने अवैध कब्जों के मामलों में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने घटना के बाद अधिकारियों द्वारा इज्जत बचाने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों की भी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं के बाद सिर्फ बिल्डरों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि घटना वाले क्षेत्र के प्रभारी अधिकारियों को छोड़ दिया जा रहा है।  कोर्ट ने रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की सुनवाई अगली तारीख तक स्थगित कर दी। 

Related Articles

दिल्ली के मालवीय नगर में बीती 3 जून को एक होटल में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं लखनऊ में बीती 22 जून को एक व्यवसायिक परिसर में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई थी।अदालत ने दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे नगर निकाय के आचरण से चिंतित हैं। 

अवैध कब्जों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निकायों को दिया अल्टीमेटम
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अवैध कब्जों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान  मालवीय नगर की घटना, लखनऊ में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमें उम्मीद थी कि अधिकारी कुछ कार्रवाई करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अदालत ने ये भी पूछा कि मालवीय नगर की घटना के बाद दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और सरोजनी नगर जैसे इलाकों का सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है और इस संबंध में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। इस विशेषज्ञ समिति में आईआईटी दिल्ली के सिविल विभाग के दो वरिष्ठ प्रोफेसर, आईआईटी के दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारी और कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी भी शामिल रहेंगे। विशेषज्ञ समिति अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 

अदालत ने पूछा- 20 मई के आदेश के बाद क्या कार्रवाई की?
अदालत ने बीती 20 मई को सुरक्षा अधिकारियों को सुरक्षा मानदंड पर निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर भी संज्ञान लिया, जिनमें बताया गया कि गुरुग्राम की 93 प्रतिशत इमारतें अग्नि सुरक्षा ऑडिट में फेल रही हैं। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अधिकारियों को 20 मई को निर्देश दिए गए थे कि क्या करना है। लेकिन आदेश के बावजूद एनसीआर में अग्निकांड हुए। अदालत ने पूछा कि उनके आदेश के बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?

अदालत ने कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। अदालत ने माना कि एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत से अंधाधुंध अवैध निर्माण हुए हैं। 

 

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button