
भोपाल
पुलिस मुख्यालय भोपाल में आज पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से मध्यप्रदेश भ्रमण पर आए 21 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की।
भारत दर्शन के अंतर्गत मध्यप्रदेश पहुंचे इस दल में भारतीय पुलिस सेवा के 19 प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ दो विदेशी पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। दल में उत्तरप्रदेश, बिहार, नागालैंड, केरल, पश्चिम बंगाल, मेघालय, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों के प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी तथा मॉरीशस एवं नेपाल के पुलिस अधिकारी सम्मिलित हैं।
पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों का मध्यप्रदेश में स्वागत करते हुए उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में चयन के लिए बधाई दी तथा उनके परिवारजनों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रति आजीवन उत्तरदायित्व है। यदि अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेंगे तो उन्हें अपने सेवाकाल में सबसे अधिक संतुष्टि जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने से मिलेगी।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिसिंग तेजी से तकनीक आधारित हो रही है, लेकिन इसके साथ-साथ मूलभूत पुलिसिंग के सिद्धांतों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग—दोनों का संतुलित एवं सर्वोत्तम उपयोग ही प्रभावी कानून व्यवस्था की कुंजी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को कानून एवं नियमों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेने चाहिए तथा जनता की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि एक अधिकारी की पहचान उसकी नैतिकता, सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता से होती है। उच्च नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना प्रत्येक पुलिस अधिकारी का पहला दायित्व है। व्यक्ति की अच्छी छवि बनने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन एक गलत निर्णय या आचरण उसे क्षणभर में धूमिल कर सकता है। इसलिए सेवा के प्रत्येक चरण में ईमानदारी, अनुशासन और मर्यादित आचरण बनाए रखना आवश्यक है।
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस सेवा में चुनौतियां निरंतर बढ़ती रहेंगी, लेकिन प्रत्येक परिस्थिति का सामना धैर्य, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण से करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधीनस्थों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करें तथा अनुशासनहीनता अथवा गलत कार्यों पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। डीजीपी मकवाणा ने कहा कि नेतृत्व का सबसे महत्वपूर्ण गुण विश्वास अर्जित करना है। जब जनता और अधीनस्थ आपके निर्णयों एवं व्यक्तित्व पर भरोसा करेंगे, तभी आपका नेतृत्व प्रभावी सिद्ध होगा।
डीजीपी मकवाणा ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रत्येक पदस्थापना सीखने का अवसर होती है। कठिन परिस्थितियों में भी यदि अधिकारी अपने शत-प्रतिशत प्रयास, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें तो वे समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) रवि कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस की समृद्ध परंपराओं, पेशेवर कार्यशैली एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक विशेषताओं की जानकारी देते हुए प्रदेश में दस्यु उन्मूलन तथा नक्सल समस्या के प्रभावी नियंत्रण की सफलता का उल्लेख किया। गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने जनभागीदारी आधारित पुलिसिंग के माध्यम से अनेक नवाचार किए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है।
प्रशिक्षु अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस के जन-जागरूकता अभियानों "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" एवं "सेफ क्लिक 2.0" पर आधारित वीडियो भी दिखाए तथा इन अभियानों की अवधारणा, व्यापक जनसहभागिता और सामाजिक प्रभाव की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने पुलिसिंग, नेतृत्व, तकनीक आधारित अपराध नियंत्रण, सामुदायिक पुलिसिंग एवं सेवा संबंधी विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।
उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण मनीष अग्रवाल, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी रामजी वास्तव, एसओ टू डीजीपी मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक मती निमिषा पाण्डेय, मती अंशुमान अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।






