
चार पैनल चर्चाओं में आधुनिक नगर नियोजन, डिजिटल शहरी शासन, जलवायु अनुकूल विकास और शहरी निवेश की संभावनाओं पर हुआ मंथन
भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए शहरों का नियोजन समुचित प्रकार से किया जाना बहुत जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार बुधवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में ‘मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ (रोड टू ग्लोबल ग्रोथ समिट 2027) हुई। कॉन्क्लेव में शहरी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से 4 महत्वपूर्ण पैनल चर्चाओं (डिस्कशन) का आयोजन किया गया। इन चर्चाओं में सुनियोजित शहरी विकास, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल तकनीक, जलवायु अनुकूल शहरों के निर्माण, जल सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन तथा शहरी निवेश एवं वित्तपोषण की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
महानगरों से आगे पुनर्घनत्वीकरण, टीओडी एवं टीडीआर के माध्यम से शहरी विकास
प्रथम पैनल चर्चा में ‘महानगरों से आगे: पुनर्घनत्वीकरण, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट एवं ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स के माध्यम से शहरी विकास’ विषय पर मंथन हुआ। पैनल का संचालन हैबिटेट टेक्टोनिक्स आर्किटेक्चर एंड अर्बनिज्म की संस्थापक भागीदार श्रीमती मृगांका सक्सेना ने किया।
पैनल प्रमुख एवं मध्यप्रदेश मेट्रो के प्रबंध संचालक कृष्ण चैतन्य ने कहा कि सुनियोजित विकास के बिना बेहतर जीवन सुविधाओं वाले शहरों का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने स्वच्छता, हरित ऊर्जा, बेहतर कनेक्टिविटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा औद्योगिक एवं आर्थिक कॉरिडोर को शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही टीडीआर नियमों एवं ऑनलाइन टीओडी पोर्टल की जानकारी दी।
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष विवेक दमानी ने नगर नियोजन में विकासकर्ताओं एवं उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने तथा परियोजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की आवश्यकता बताई।
डेला ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक जिमी मिस्त्री ने मानव-केंद्रित शहरी विकास पर जोर देते हुए टीओडी, टीडीआर एवं एफएसआई मानकों के अनुरूप एकीकृत मास्टर प्लानिंग और दक्ष आर्किटेक्चर की सहभागिता को आवश्यक बताया।
मेडुला सॉफ्ट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शांतनु शर्मा ने यातायात की वास्तविक मांग के अनुरूप नगर नियोजन, शहरी घनत्व के बेहतर प्रबंधन तथा लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर दिया।
सीईपीटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शाश्वत बंद्योपाध्याय ने अधोसंरचना एवं बाजार की मांग के अनुरूप शहरी विस्तार की योजना बनाने, लैंड पूलिंग तथा हितधारकों के लिए सूचनाओं की सुगम उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया।
ईएसआरआई की कंट्री हेड डॉ. रूमा चक्रवर्ती ने जीआईएस आधारित नगर नियोजन पर प्रकाश डालते हुए मध्यप्रदेश शासन के ‘गरुड़ एमपी’ प्लेटफॉर्म, डिजिटल ट्विन तकनीक तथा मास्टर प्लान से भवन निर्माण स्वीकृति तक की प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दिया।
नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक सुश्री एना रॉय ने शहरी विकास योजनाओं में अभिसरण एवं समन्वय की आवश्यकता बताते हुए मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप लचीले नगर नियोजन पर जोर दिया।
सुधारों एवं डिजिटल सक्षमता के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना
द्वितीय पैनल चर्चा में ‘सुधारों एवं डिजिटल सक्षमता के माध्यम से शहरी शासन की पुनर्कल्पना’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-गवर्नेंस, डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नागरिक-केंद्रित सेवाओं के विस्तार पर चर्चा हुई।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव नंदकुमारम ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट मानक और मान्यता प्राप्त व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कार्यकुशलता बढ़ाने, सिस्टम थिंकिंग अपनाने तथा शासकीय कार्यप्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।
पैनल अध्यक्ष एवं नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि प्रौद्योगिकी शहरी शासन में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है। उन्होंने डिजिटल इंडिया के लाभों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए नागरिक-केंद्रित डीपीआई, हब एंड स्पोक मॉडल तथा भविष्य की सायबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने की आवश्यकता बताई।
प्रोटियन ई-गवर्न टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य बिजनेस एवं प्रोडक्ट ऑफिसर राकेश दोशी ने डिजिटल पहचान, संपत्ति, दस्तावेजों एवं ओपन नेटवर्क सिस्टम की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सॉफ्टवेयर विकास में लचीलापन तथा नागरिकों, सरकार एवं व्यवसायों के बीच डिजिटल समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।
उन्नयन के संस्थापक भागीदार सुहास दत्ता ने डेटा आधारित डिजिटल अधोसंरचना एवं डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से शासकीय विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
योटा इंफ्रास्ट्रक्चर की सुश्री ज्योति मालदे ने सुदृढ़ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी एकीकरण को आवश्यक बताया। मित्रा के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमन मित्तल ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग से समय, कार्यभार एवं संसाधनों की व्यापक बचत संभव है।






