उत्तर प्रदेश

पति सौरभ की हत्या मामले में मुस्कान-साहिल को मृत्युदंड, कोर्ट में बोलीं- ‘मेरी बच्चियों का ध्यान रखना’

मेरठ 

मेरठ में प्रेमी के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या करने वाली मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई गई। उसके प्रेमी साहिल को भी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए जज ने कहा- यह नृशंस हत्याकांड है, माफी स्वीकार नहीं होगी। सजा सुनाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया। मुस्कान रस्तोगी और साहिल फूट-फूटकर रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा- तुम अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी हो, क्या सजा चाहती हो? उसने जवाब दिया- मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। फिर वह खामोश हो गई। इसके बाद साहिल से यही सवाल पूछा गया, तो वह चुप रहा।

सजा के ऐलान के बाद सौरभ की मां रो पड़ीं। कहा- शांति से न्याय मिल गया। सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च, 2025 को हुई थी। शव को 5 टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में भर दिया गया था।मार्च 2025 में मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट से बंद कर दिए गए थे. जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। 

अदालत ने 30 सितंबर 2026 को सुरक्षित रखा था
मामले में मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था और बुधवार को सजा पर अंतिम फैसला आया. मामले में जिला अदालत ने इस मामले में दोनों को फांसी की सजा सुनाई। 

इस दौरान कोर्ट की टिप्पणी ने भी सभी का ध्यान खींचा. मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत में महाभारत का भी जिक्र हुआ. सामने आया है कि फैसला सुनाने से पहले जज कोर्ट में मु्स्कुराते हुए आए, उन्होंने फैसला पढ़ना शुरू किया इससे पहले उन्होंने अहम टिप्पणी में कहा कि 'दंड भी धर्म है'. उन्होंने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि 'दंड को भी धर्म ही बताया गया है, यानी अपराधी को दंड देना धर्म है। 

इस फैसले की जानकारी देते हुए वकील केके चौबे ने मीडिया बातचीत में कहा कि, सुनवाई के दौरान जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को दंड देना भी धर्म है. फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट रूम में 'भारत माता की जय' के नारे भी लगे. उन्होंने अदालत के फैसले को समाज के लिए एक बड़ा संदेश बताया। 

'अपराधी को सजा देना धर्म का हिस्सा'
उन्होंने कहा कि लालच में आकर करीबी रिश्तों की हत्या करने जैसे जघन्य अपराधों में कठोर सजा मिलनी चाहिए. चौबे के मुताबिक, अदालत ने महाभारत का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि अपराध करने वालों को सजा देना भी धर्म का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि 'यह फैसला समाज को संदेश देता है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के तहत कठोर दंड भुगतना पड़ेगा। 

13 महीने चला केस, 126 सुनवाई हुईं
अदालत के अधिकारियों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था. इससे पहले अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या करने और उनके शव को छिपाने की कोशिश के मामले में दोषी करार दिया था. करीब 13 महीने तक चले मुकदमे में कुल 126 सुनवाई हुईं, जिसके बाद अदालत ने दोनों को सजा सुनाई। 

हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाए
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी. आरोप था कि मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े कर दिए और उन्हें एक नीले ड्रम में रख दिया. इसके बाद अपराध को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट भर दिया गया था. यह मामला उस समय सामने आया, जब मेरठ स्थित घर से सौरभ के शव के अवशेष बरामद किए गए. हत्या के तरीके और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश के कारण यह मामला काफी चर्चित हुआ था। 

22 गवाहों की हुई गवाही
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 22 गवाह पेश किए. इनमें हत्या में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए चाकू, नीले ड्रम और अन्य सामान की खरीद से जुड़े लोग भी शामिल थे. इसके अलावा होटल मैनेजरों और कैब ड्राइवरों की भी गवाही कराई गई. इन गवाहों के जरिए आरोपियों की गतिविधियों और अलग-अलग स्थानों पर उनकी आवाजाही को साबित करने की कोशिश की गई. अदालत में आरोपियों के विभिन्न स्थानों पर ठहरने से संबंधित रिकॉर्ड भी पेश किए गए। 

करीब 13 महीने तक चली सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पहले दोनों को दोषी करार दिया और अब मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। 

कब क्या हुआ था?
24 फरवरी 2025 को मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत लंदन से वापस मेरठ लौटे और इंदिरा नगर स्थित अपने घर पहुंचे। 
25 फरवरी 2025 को सौरभ के घर में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी का जन्मदिन मनाया गया। 

28 फरवरी 2025 को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया गया.
3 मार्च 2025: अभियोजन पक्ष के अनुसार, साजिश के तहत सौरभ को नींद की दवा दी गई और उसके बाद उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को घर बुलाया गया, जहां सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी गई. इसके बाद शव के टुकड़े कर उसे सीमेंट भरकर एक नीले ड्रम में सील कर दिया गया। 

4 मार्च 2025: इस दिन मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला घूमने निकल गई और सौरभ के फोन से मैसेज भेजकर परिवार को धोखे में रखा। 
17 मार्च 2025: शिमला से लौटने के बाद जब मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की, तो घर के अंदर रखे नीले ड्रम से सौरभ राजपूत के शव के टुकड़े बरामद किए गए. पुलिस ने आरोपी मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया। 

7. मार्च 2025 से सितंबर 2026: इस मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली. अदालत में कुल 126 पेशियां (सुनवाई की तारीखें) हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 
30 सितंबर 2026 लगभग 545 दिनों की कानूनी प्रक्रिया और अंतिम बहस पूरी होने के बाद, मेरठ जिला अदालत द्वारा इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी मुस्कान और साहिल पर ऐतिहासिक फैसला आया है। 

आइए जानते हैं इस केस से जुड़े पल-पल के अपडेट्स….

जजमेंट के बाद कोर्ट के बाहर मिठाई बांटी गई. फैसले से सौरभ का परिवार संतुष्ट। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महाभारत का जिक्र किया. जज ने कहा- दंड देना भी धर्म है. सजा के ऐलान के बाद कोर्ट रूम में भारत माता की जय के नारे लगे। 
 सबसे खास बात यह रही कि सजा सुनाए जाने से ठीक पहले सुबह के वक्त मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में लिखित रूप में दिया कि यदि उनकी बेटी को फांसी भी दी जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. साथ ही, परिवार ने सौरभ को एक बहुत ही अच्छा लड़का बताया। 

मेरठ कोर्ट ने मुस्कान और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल से जुड़े थे. वहीं, कोर्ट रूम में मृतक सौरभ राजपूत की मां रेनू राजपूत और उनके भाई मौजूद रहे। 

 दोनों तरफ के वकील कोर्ट रूम में पहुंचे. जज अरविंद मिश्रा भी पहुंचे. किसी भी वक्त फैसला आ सकता है. दोनों आरोपी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े। 

 फैसले से पहले सौरभ का परिवार कोर्ट पहुंचा. सौरभ की मां, मौसी, भाई अन्य लोग कोर्ट पहुंच गए हैं. मुस्कान-साहिल पर फैसले के वक्त अदालत में परिवार मौजूद रहेगा. परिवार ने मुस्कान-साहिल को फांसी की मांग की है। 

 सजा के ऐलान से पहले सौरभ की मां ने 'आजतक' से कहा कि बेटे सौरभ की हत्या के बाद मेरे परिवार ने न्याय पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया. प्रशासन और उन सभी लोगों का आभार, जिन्होंने मामले में हमारा साथ दिया. पूरी उम्मीद है कि इन गवाहियों और दूसरे सबूतों के आधार पर हमें न्याय मिलेगा. मुस्कान-साहिल को फांसी होगी। 

 सौरभ हत्याकांड को लेकर मुस्कान और साहिल की सजा पर फैसले को लेकर सुनवाई फिर से शुरू हो गई है. कोर्ट रूम में जज की तरफ से सभी सबूतों को चेक किया जा रहा है और देशभर की नजर इस केस के फैसले पर है। 

घटना के सामने आने के लगभग 19 महीने बाद भी मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके की वह संकरी गली जहां हत्या हुई थी, आज भी इस मामले से जुड़ी हुई है. जिस घर में अपराध हुआ था, वह घटना के बाद से ही बंद पड़ा है. घर के मालिक ओमपाल सिंह ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उनके बेटे विदेश में रहते हैं और वे खुद उस घर में नहीं रहते। 

 सौरभ राजपूत की हत्या 4 मार्च, 2025 को हुई थी. आरोप है कि आरोपियों ने उनके शव के टुकड़े कर दिए और अवशेषों को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया था. जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ़्तार किया गया. इस दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने सबूत और गवाह पेश किए। 

 शर्मा के मुताबिक दोनों को दोषी करार दिए जाने के बाद सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी और भाई राहुल भावुक हो गए और दोषियों के लिए मौत की सज़ा की मांग की. परिवार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन वे चाहते हैं कि दोनों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। 

जेल सुपरिटेंडेंट डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक दोनों को सज़ा पर अपनी बात रखने का मौका दिया गया था. जिसमें वे कारण भी शामिल थे कि उन्हें कम सज़ा क्यों दी जानी चाहिए। 

 जेल सुपरिटेंडेंट डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान, जिनकी 10 महीने की बेटी उनके साथ जेल में रह रही है, ने बच्ची के भविष्य को लेकर चिंता जताई और इस बारे में सवाल भी पूछे. उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक, बच्चा छह साल का होने तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है। 

 जेल अधीक्षक के मुताबिक, दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों की जेल में रहने की व्यवस्था और नियमों में बदलाव होगा.उन्हें जेल के निर्धारित कपड़े पहनने होंगे और जेल मैनुअल के अनुसार काम भी करना पड़ सकता है. जरूरत और उपलब्धता के आधार पर पुरुष बंदी को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है, जबकि महिला बंदी को निर्धारित नियमों के तहत महिला जेल में भेजा जा सकता है। 

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को दोषियों की सजा पर अदालत में बहस हुई. अभियोजन पक्ष ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के लिए फांसी की सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा देने की अपील की. अभियोजन ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी विरलतम श्रेणी का अपराध बताते हुए मृत्युदंड दिए जाने की दलील दी। 

 बचाव पक्ष के तरफ़ से मिनिमम सज़ा की मांग की गई. रेयरेस्ट केस का हवाला देकर फांसी की मांग की गई है. जानकारी के मुताबिक इस केस पर फैसला आज शाम 4 बजे सज़ा सुनाई जाएगी.  सुनवाई के दौरान कहा गया है कि ये हत्या कर के ये रुके नहीं, ये घूमते रहे. हत्या सोच समझ कर की गई. ऐसे में मामलों में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तीन साइटेशन दिया गया है, जिसमे मृत्युदंड का उल्लेख है। 

जेल अधीक्षक ने बताया कि मुस्कान ने अपनी छह से सात साल की बेटी के बाहर होने की बात कही थी. वह बेटी से मिलना चाहती है और इसके लिए बेचैन है. हालांकि, अब तक उससे मिलने के लिए कोई नहीं आया है. मुस्कान को बताया गया है कि यदि वह बेटी या किसी अन्य व्यक्ति को पत्र लिखना चाहती है, तो उसे इसकी अनुमति दी जा सकती है. जेल प्रशासन की प्रक्रिया के तहत उसे कागज और कलम उपलब्ध कराए जाएंगे. पत्र की सुरक्षा जांच के बाद उसे बताए गए पते पर भेजा जाएगा। 

  जेल अधीक्षक के अनुसार, मुस्कान का व्यवहार भी पहले के मुकाबले बदल गया है. वह पहले अन्य महिला बंदियों के साथ सामान्य तरीके से बातचीत करती थी, लेकिन अब बातचीत करने से बच रही है और एकांत में रहना पसंद कर रही है. वह अपना अधिकांश समय पूजा-पाठ में बिता रही है. महिला बैरक में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, इसलिए जेल स्टाफ के माध्यम से उस पर निगरानी रखी जा रही है. साहिल की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। 

 

 

 

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