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चीन जमीन के अंदर 10KM की क्यों खुदाई कर रहा? जानिए ड्रैगन का असल मकसद

बीजिंग

चीन अक्सर अपने क्रियाकलापों को लेकर चर्चा में रहता है। अब एक बार फिर चीन की चर्चा हो रही है। दरअसल चीन ने एक सीक्रेट मिशन के तहत जमीन के भीतर 10 हजार मीटर गहरा गड्ढा खोद रहा है। चीन ने अपने इस मिशन की वजह का खुलासा नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि चीन उर्जा और खनिज की खोज कर रहा है।

मंगलवार से शुरु हुई खुदाई
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में मंगलवार से खुदाई का काम शुरू कर दिया है। इससे पहले चीन ने गोबी रेगिस्तान स्थित अपने सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से तीन अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की यह खुदाई धरती की क्रेटेशियस सिस्टम परत तक जाएगी, जहां लगभग 145 मिलियन वर्ष पुरानी चट्टानें हैं। यह प्रोजेक्ट काफी मुश्किल बताया जा रहा है।

चीन यह खुदाई क्यों कर रहा है, उसके बारे में चीन ने खुलासा नहीं किया है लेकिन चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खुदाई से कई खनिज संसाधनों और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि अभी भी धरती में सबसे गहरी खुदाई रूस के नाम पर है। रूस ने साल 1989 में 12,262 मीटर गहरा गड्ढा खोदा था। रूस को इतनी गहराई तक खुदाई में 20 साल का समय लगा था।

लंबे समय से खुदाई की योजना बना रहा था चीन
चीन लंबे समय से जमीन में इतनी गहरी खुदाई की योजना बना रहा था। साल 2021 में भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी एक स्पीच में भी इसका जिक्र किया था।

रूस के कोला प्रायद्वीप में दुनिया का सबसे गहरा छेद

क्रेटेसियस परत को क्रेटेसियस सिस्‍टम कहा जाता है जो 14 करोड़ 50 लाख साल पुराना है। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चीन इस परियोजना के जरिए न केवल खनिजों की पहचान कर सकेगा बल्कि भूकंप और ज्‍वालामुखी विस्‍फोट जैसे पर्यावरणीय खतरों का आकलन कर सकेगा। यह छेद भले ही 10 किमी गहरा हो लेकिन यह दुनिया में सबसे ज्‍यादा गहरा नहीं है। दुनिया का सबसे ज्‍यादा गहरा छेद उत्‍तर पश्चिमी रूस में कोला प्रायद्वीप में किया गया है। इसके कोला सुपरडीप बोरहोल कहा जाता है। यह छेद समुद्र की सतह से 11,034 मीटर गहरा है।

कोला के दल ने पाया था कि इतना गीला था जिसकी उन्‍होंने अपेक्षा तक नहीं की थी। इस बोरहोल के पहले तक वैज्ञानिक मानते थे कि पानी चट्टान के इतना नीचे तक नहीं जा सकता है। धरती के इतना नीचे तक खुदाई करना हमेशा से ही आसान नहीं रहा है। साल 1960 के दशक में एक अमेरिकी दल ने समुद्री सतह के 600 फुट नीचे तक खुदाई कर ली थी लेकिन बाद में इस प्रॉजेक्‍ट को कुप्रबंधन और वित्‍तीय संकट के कारण कैंसिल करना पड़ा। चीनी अकादमी ऑफ इंजीनियरिंग के वैज्ञानिक सुन जिन‍शेंग ने इसी वजह से इसकी तुलना ट्रक के स्‍टील के तार पर दौड़ाने से की है।

चीन एक के बाद एक कर रहा कई कारनामे

धरती के ऊपरी परत के बारे में माना जाता है कि यह 30 किमी तक मोटी है। हालांकि पहाड़ी इलाके में यह 100 किमी तक मोटी हो सकती है। चीनी तकनीकी विशेषज्ञ वांग चुनशेंग ने कहा कि 10 हजार मीटर की गहराई में बोरबेल की खुदाई करना एक बहुत साहसिक प्रयास है जिसके जरिए पृथ्‍वी के अज्ञात इलाके का पता लगाया जा सकता है। यह खुदाई ऐसे समय पर शुरू हुई है जब चीन ने अपने पहले आम नागरिक को अंतरिक्ष स्‍टेशन पर भेजा है और 12 हजार टन के अपतटीय ड्रिलिंग रिग को लगाया गया है ताकि प्राकृतिक गैस के भंडार का दोहन किया जा सके। ताजा खुदाई में तारिम बेसिन में चीन जमीन के अंदर पाइप डालने की कोशिश करेगा।

 

KhabarBhoomi Desk-1

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