
अक्सर हम घर को सजाने के लिए दीवारों पर सुंदर पेंटिंग्स या तस्वीरें लगा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे केवल सजावट की वस्तु नहीं हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर तस्वीर एक विशिष्ट ऊर्जा पैदा करती है, जो आपके मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डालती है। एक घर सिर्फ ईंट, पेंट और फर्नीचर से नहीं बनता।
यह एक जीवंत स्थान है जो हमारी भावनाओं, यादों और प्राण-ऊर्जा से जुड़ा होता है। इस ऊर्जा को सबसे खामोश, लेकिन सबसे प्रभावशाली तरीके से प्रभावित करती हैं हमारी दीवारों पर लगी तस्वीरें और पेंटिंग्स।
अक्सर हम सजावट अनजाने में करते हैं। किसी गैलरी से पसंद आई पेंटिंग ले आए, सीढ़ियों के बगल वाली दीवार को एस्थेटिक लुक देने के लिए परिवार-दोस्तों के साथ बिताए खुशनुमा पलों का कोलाज बना दिया या पूर्वजों की तस्वीरों को सहेज दिया। ये फ्रेम घर के खालीपन को तो भर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये तस्वीरें आपके घर की ऊर्जा और आपके जीवन को किस दिशा में मोड़ रही हैं!
मूक संवाद हैं तस्वीरें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, दृश्य कभी भी निष्पक्ष नहीं होते। हमारा मस्तिष्क उन प्रतीकों और मानसिक संदेशों को लगातार ग्रहण करता रहता है।तस्वीरें मूक संवाद होती हैं। जब हम उन्हें सचेत रूप से देखना बंद भी कर देते हैं, तब भी वे हमारे अवचेतन मन से बातें करती रहती हैं।
उदाहरण के लिए, डूबते हुए सूरज की पेंटिंग को लें। कलात्मक रूप से यह कितनी भी सुंदर और रंगों से भरपूर क्यों न हो, लेकिन यह अंत, ठहराव और अवसान का प्रतीक है। यदि इसे लिविंग रूम जैसे सक्रिय स्थान पर लगाया जाए, तो यह आलस्य या भावनात्मक भारीपन पैदा कर सकती है। इसके विपरीत, उगता हुआ सूरज साहस, नवीनीकरण और प्रगति का प्रतीक है ऐसी ऊर्जा जो संवाद और विकास को बढ़ावा देती है।
मनोविज्ञान और दृश्यों का प्रभाव
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इसे समझना आसान है। मानव मस्तिष्क लगातार दृश्यों को प्रोसेस करता है। किसी तरह की तस्वीर के सामने बार-बार रहने से हमारे विचार और भावनाएं वैसी ही होने लगती हैं। संघर्ष, दुख या अकेलेपन को दर्शाने वाली तस्वीर अनजाने में मन को उन्हीं भावनाओं से बांध देती है। समय के साथ इसका असर हमारे आत्मविश्वास, प्रेरणा और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ने लगता है।
पूर्वजों की तस्वीरें और सही दिशा
पूर्वजों की तस्वीरें भावनात्मक रूप से बहुत गहराई से जुड़ी होती हैं। वास्तु के अनुसार, इन्हें लगाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सबसे उपयुक्त है। यह दिशा स्थिरता और मार्गदर्शन से जुड़ी है। यहां गरिमा के साथ लगाई गई तस्वीरें आशीर्वाद और शक्ति प्रदान करती हैं। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पूर्वजों की तस्वीरें बेडरूम या पूजा घर में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये शांति के बजाय भावनात्मक बेचैनी पैदा कर सकती हैं। दीवारें सिर्फ फ्रेम थामने के लिए नहीं होतीं, वे आपके इरादों को बुलंद करती हैं। हम हर दिन जिन तस्वीरों के साथ रहते हैं, वे हमारे आंतरिक संसार पर एक गहरी छाप छोड़ती हैं। कला का चुनाव केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता के साथ होना चाहिए। जब घर की दीवारें सही ऊर्जा से सजी होती हैं, तो वहां रहने वाले लोग भी स्पष्टता, स्थिरता और शांति के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं।
हर कमरे की अपनी जरूरत
बैठक: उगते हुए सूरज की तस्वीर, दौड़ते हुए सात सफेद घोड़ों की तस्वीर (तरक्की के लिए), या हरे-भरे जंगल के दृश्य लगाएं। यहां युद्ध, जंगली जानवरों, या उदासी वाली पेंटिंग्स न लगाएं।
स्टडी रूम: मां सरस्वती, भगवान गणेश, या महान विद्वानों/प्रेरणादायक महापुरुषों की तस्वीरें। उगते सूरज या उड़ते हुए पक्षी भी सकारात्मकता देते हैं।
शयनकक्ष: यहां शांति और प्रेम की आवश्यकता होती है। सुखद परिदृश्य, कोमल रंग या जोड़े (जैसे हंसों का जोड़ा) की तस्वीरें आपसी तालमेल बढ़ाती हैं।
कार्यक्षेत्र : अगर आप घर से ही काम करते हैं या कोई ऐसा कोना है जहां आप काम करते हैं तो यहां के लिए आपको एकाग्रता और प्रेरणा चाहिए। इस स्थान पर दौड़ते हुए घोड़े, ऊंचे पर्वत या उगते सूरज की तस्वीरें फोकस और कार्यक्षमता बढ़ाती हैं।
बिना तोड़-फोड़ के वास्तु उपाय
आजकल के फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में तोड़-फोड़ करना संभव नहीं होता, ऐसे में पेंटिंग्स एक ‘रेमेडी’ की तरह भी काम कर सकती हैं:
उत्तर दिशा: करियर में प्रगति के लिए जल तत्व वाली पेंटिंग।
दक्षिण-पश्चिम: स्थिरता के लिए पहाड़ों के चित्र।
पूर्व दिशा: स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों के लिए उगता सूरज।
वास्तु के अनुसार क्या न लगाएं?
वास्तु शास्त्र में कुछ विषयों को घर के भीतर रखने की सख्त मनाही है, चाहे उनका कलात्मक मूल्य कितना भी अधिक क्यों न हो, मगर ये दृश्य असंतोष, अनिश्चितता और जड़ता को आमंत्रित करते हैं:
हिंसक दृश्य: युद्ध के दृश्य, शिकारी जानवर या अशांत समुद्र।
नकारात्मक प्रतीक: डूबती हुई नाव, खंडहर, बिना पत्तियों वाले सूखे पेड़ या दुख से भरे चेहरे।






