मध्यप्रदेश

विधानसभा चुनावों में इस बार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नोटा वोट जीत के अंतर से अधिक

भोपाल

हाल ही में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चुनावों में नोटा के विकल्प को खत्म करने की बात कही थी। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि नोटा को जीत के अंतर यानी कि मार्जिन से ज्यादा वोट मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता अनजाने में नोटा चुन लेते हैं। ईवीएम में यह विकल्प सभी उम्मीदवारों के नाम के बाद सबसे आखिरी में आता है। इसका अपना प्रतीक मतपत्र होता है, जिस पर काला क्रॉस लगा होता है।भूपेश बघेल का ये अनुमान ठीक निकला। हाल ही में खत्म हुए विधानसभा चुनावों में इस बार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नोटा वोट जीत के अंतर से अधिक हो गए। इसमें मध्य प्रदेश में 20 और छत्तीसगढ़ में 8 सीटों पर नोटा वोट की संख्या जीत के मार्जिन से ज्यादा रही। अधिकतर सीटें बहुत कम अंतर से जीती गईं, जिनमें सबसे कम 16 वोटों से मिली जीत भी शामिल है।

हालांकि कुल मिलाकर नोटा वोटों की हिस्सेदारी 2018 के चुनावों में 1.41% से घटकर इस बार 0.97% हो गई। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में केवल 1 सीट पर उसका वोट शेयर 5% से अधिक रहा। 2018 में नोटा वोटों का सबसे बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में था, जब 4 सीटों पर नोटा को 5% से अधिक वोट मिले थे।
 

छत्तीसगढ

सीटविजेताउप विजेताजीत का मार्जिननोटा के वोट
कांकेरबीजेपीकांग्रेस162729
अंबिकापुरबीजेपीकांग्रेस942168
पत्थलगांवबीजेपीकांग्रेस2553131
बिन्द्रनवागढ़कांग्रेसबीजेपी8163710
कोंटाकांग्रेसबीजेपी19813691
धमतरीकांग्रेसबीजेपी26062695
बीजापुरकांग्रेसबीजेपी27063628
पाली तानाखारजीजीपीकांग्रेस7143557

छत्तीसगढ़ में, भाजपा ने उन 8 सीटों में से 3 पर जीत हासिल की जहां नोटा जीत के अंतर से अधिक था। संयोग से ये सीटें, कांकेर और अंबिकापुर, क्रमशः केवल 16 और 94 वोटों के बेहद कम अंतर से जीती गईं। अंबिकापुर में पूर्व डिप्टी सीएम टी एस सिंह देव को करारी हार का सामना करना पड़ा। अंबिकापुर में नोटा को 2,168 वोट मिले। कांग्रेस ने 8 में से 4 सीटें जीतीं और अन्य 4 पर उपविजेता रही, जबकि आदिवासी आधारित गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 1 सीट जीती।

मध्य प्रदेश

 

सीटविजेताउपविजेताजीत का अंतरनोटा के वोट
शाजापुरबीजेपीकांग्रेस281534
धरमपुरीबीजेपीकांग्रेस3562455
मांधाताबीजेपीकांग्रेस5891554
गुन्नौरबीजेपीकांग्रेस11602012
सोहागपुरबीजेपीकांग्रेस17622362
धौहानीबीजेपीकांग्रेस33213459
अलीराजपुरबीजेपीकांग्रेस37233814
महीदपुरकांग्रेसबीजेपी2901417
बैहरकांग्रेसबीजेपी5513484
भीकनगांवकांग्रेसबीजेपी6031799
गोहदकांग्रेसबीजेपी607790
सेमरियाकांग्रेसबीजेपी6371069
मानावरकांग्रेसबीजेपी7081814
हरदाकांग्रेसबीजेपी8702357
राजपुरकांग्रेसबीजेपी8901683
टिमरनीकांग्रेसबीजेपी9502561
मंडलाकांग्रेसबीजेपी13403108
सेंधावाकांग्रेसबीजेपी16775098
परसियाकांग्रेसबीजेपी21683049
जुन्नारदेवकांग्रेसबीजेपी32105086

नोटा वोटों से मध्य प्रदेश की 20 सीटों पर फर्क पड़ सकता था। इसमें से भाजपा ने 7 और कांग्रेस ने 13 सीटें जीतीं। उदाहरण के लिए, शाजापुर में बीजेपी 28 वोटों के अंतर से जीती और यहां नोटा को 1,534 वोट मिला। इन 20 सीटों में से 12 सीटों पर जीत का अंतर 1,000 वोटों से कम था। जबकि नोटा को इन सीटों पर औसतन 2,525 वोट मिले। यहां औसत जीत का अंतर 1,272 वोट था। मध्य प्रदेश के जोबट में नोटा वोट शेयर सबसे अधिक 2.8% था।

 

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