छत्तीसगढ़

तिल्दा-नेवरा नगरपालिका की घोर लापरवाही: गांधी वार्ड के सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद, ‘स्वच्छ भारत’ अभियान को लग रहा पलीता

तिल्दा-नेवरा। स्वच्छ भारत अभियान के नारों के बीच तिल्दा-नेवरा नगरपालिका की घोर लापरवाही सामने आई है। नगरपालिका क्षेत्र के गांधी वार्ड क्रमांक 09 में स्थित सार्वजनिक शौचालय पिछले कई महीनों से ताले में बंद हैं, जिसके कारण वार्डवासी खुले में शौच करने को विवश हैं। यह स्थिति न केवल स्वच्छता के दावों पर सवाल उठाती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
वार्डवासियों ने इस समस्या को लेकर नगरपालिका, अपने वार्ड प्रतिनिधियों और यहां तक कि जन निवारण पोर्टल 1100 पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका कहना है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा है।
दो शौचालय — दोनों ही उपेक्षा के शिकार
गांधी वार्ड 09 में दो सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बद से बदतर है:

कोटा रोड, पीतांबरा फूड के पास स्थित शौचालय: यह शौचालय पिछले 11 सालों से अधूरा पड़ा हुआ है। बताया जाता है कि ठेकेदार ने काम बीच में ही छोड़ दिया और उसके बाद से न तो किसी अधिकारी ने और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध ली। यह भवन अब सिर्फ एक जीर्ण-शीर्ण ढांचे के रूप में खड़ा है।

नारायण धीरे के घर के पीछे, वार्ड 09 की बस्ती में स्थित शौचालय: यह शौचालय पिछले एक महीने से ताले में बंद है, मानो यह कोई अमूल्य धरोहर हो जिसे जनता के उपयोग के लिए नहीं खोला जा सकता।
जनता की मजबूरी और प्रशासन का दोहरा मानदंड
सार्वजनिक शौचालयों के बंद होने से स्थानीय नागरिक खुले में और सड़कों किनारे शौच करने पर मजबूर हैं। विडंबना यह है कि एक समय था जब नगरपालिका खुले में शौच करने वालों पर जुर्माना लगाने की बात करती थी और इस संबंध में बोर्ड भी लगाए गए थे। लेकिन आज जब खुद नगरपालिका ने सार्वजनिक शौचालयों को बंद कर दिया है, तो सवाल उठता है कि खुले में शौच करने के लिए अब दंड किस पर लगना चाहिए – उन मजबूर नागरिकों पर या नगरपालिका के लापरवाह अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर?
जनता का आक्रोश और ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ की स्थिति
वार्डवासियों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि नगर पालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपनी सुविधाओं और निधियों के उपयोग में मस्त हैं, जबकि जनता की मूलभूत समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है। यह हालात कहीं ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली कहावत को सच साबित तो नहीं कर रहे?
स्थानीय नागरिकों का प्रश्न है कि आखिर स्वच्छ भारत अभियान क्या सिर्फ कागजों और बड़े-बड़े नारों तक ही सीमित रह गया है? जब शौचालय उपलब्ध ही नहीं होंगे या बंद पड़े रहेंगे, तो स्वच्छता का लक्ष्य कैसे प्राप्त होगा? प्रशासन से तुरंत इन शौचालयों को खुलवाने और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को पूरा करवाने की मांग की जा रही है, ताकि वार्डवासियों को इस गंभीर समस्या से निजात मिल सके।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button