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टेनिस डायरी: ओलंपिक में नहीं खलेंगे वावरिंका और सिमोना, एंडी मरे ने जीत से की वापसी

नई दिल्ली, जेएनएन। विश्व नंबर तीन रोम की सिमोना हालेप और तीन ग्रैंडस्लैम खिताब अपने नाम कर चुके स्विट्जरलैंड के स्टेंन वावरिंका, इन दोनों दिग्गज खिलाडियों ने आगामी टोक्यो ओलंपिक से नाम वापस ले लिया है। हालेप जहां पिंडली की चोट से जूझ रही हैं वहीं वावरिंका पैर की चोट से उबरने की कोशिश में लगे हुए हैं।

हालेप ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा कि मेरी पिंडली की चोट ठीक होने में और समय लगेगा। इस कारण मैं टोक्यो ओलंपिक में भाग नहीं ले पाउंगी। हालांकि अपने इस फैसले से मैं काफू दुखी भी हूं कि इतने बड़े स्तर पर देश के लिए नहीं खेल पाउंगी।

दुनिया के पूर्व तीसरे नंबर के खिलाड़ी 36 वर्षीय वावरिंका ने इस साल की शुरुआत में अपने बाएं पैर का आपरेशन करवाया था और मार्च में कतर ओपन में लायड हैरिस द्वारा अपनी शुरुआती दौर की हार के बाद से नहीं खेले हैं। वावरिंका की प्रबंध टीम के मैनेजर ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि उनकी चोट अभी तक ठीक नहीं हुई है। डाक्टर ने कहा है कि इसमें अभी काफी समय लगेगा। जिस कारण वह इस बार ओलंपिक खेलों में स्विट्जरलैंड के लिए नहीं खेल सकेंगे। इससे वह काफी निराश भी है। मालुम हो कि वावरिंका ने ओलंपिक 2008 में रोजर फेडरर के साथ जोड़ी बनाकर डबल्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।

चार साल बाद एंडी मरे ने जीत से की वापसी

विंबलडन, एपी। चार साल बाद एंडी मरे जब विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट में खेलने उतरे तो दर्शकों ने उनका इस्तकबाल खड़े होकर किया। मरे ने खुशी से दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया। दर्शक अपने घरेलू सितारे के लिए तब खुशी से चिल्लाने लगे जब मरे ने पहले दौर के मैच में 24वीं वरीयता प्राप्त निकोलोज बासिलाशविली के खिलाफ पहला सेट जीता। मरे की दूसरे सेट में जीत के बाद तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। ऐसा लग रहा था कि वह सीधे सेटों में जीत जाएंगे लेकिन उन्होंने दो मैच प्वाइंट गंवा दिए। वह तीसरा सेट हार गए और दर्शक आशंकित हो गए।

वह मरे ही थे जिन्होंने 2013 में विंबलडन जीतकर 77 साल में आल इंग्लैंड क्लब में खिताब जीतने वाले पहले ब्रिटिश खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था। वह 2016 में फिर से यहां चैंपियन बने थे लेकिन इसके बाद कूल्हे के दो आपरेशन और अन्य चोटों के कारण उनका करियर अधर में लटक गया था। मरे ने चौथे सेट में बढ़त बनाई तो उनके प्रशंसक फिर जोश से उछलने लगे। इस 34 वर्षीय खिलाड़ी ने उन्हें निराश नहीं किया और बासिलाशविली को 6-4, 6-3, 5-7, 6-3 से हराकर सेंटर कोर्ट को शोर के आगोश में भेज दिया।

दर्शकों के शोर के बीच जीत के बाद मरे ने कहा, ‘मुझसे पूछा जाता है कि क्या यह मेरा आखिरी विंबलडन होगा। क्या मेरा आखिरी मैच होगा। मुझे नहीं पता कि मुझसे ऐसा क्यों पूछा जाता है। मैं खेलना जारी रखना चाहता हूं। मैं खेलना चाहता हूं। मैं इसका लुत्फ उठा रहा हूं। मैं अब भी शीर्ष स्तर पर खेल सकता हूं। वह विश्व रैंकिंग में 28वें नंबर का खिलाड़ी है और मैंने बमुश्किल ही कोई मैच खेला। और मैंने उसे हरा दिया।’ मरे कभी विश्व में नंबर एक खिलाड़ी थे लेकिन अभी उनकी विश्व रैंकिंग 118 है। उन्होंने तीन महीने तक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था। वह सत्र का अपना छठा मैच खेल रहे थे जो कि बासिलाशविली से 30 मैच कम हैं।

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खबरभूमि एक प्रादेशिक न्यूज़ पोर्टल हैं, जहां आपको मिलती हैं राजनैतिक, मनोरंजन, खेल -जगत, व्यापार , अंर्राष्ट्रीय, छत्तीसगढ़ , मध्याप्रदेश एवं अन्य राज्यो की विश्वशनीय एवं सबसे प्रथम खबर ।

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