
पटना.
बिहार की राजनीति में अपनी बेबाकी और अलग अंदाज के लिए चर्चित लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है. इस बार उन्होंने किसी पहेली का सहारा लेने के बजाय सीधे तौर पर उन पांच नामों का खुलासा किया है, जिन्हें वे अपनी राजनीतिक राह का कांटा और ‘जयचंद’ मानते हैं. तेज प्रताप का आरोप है कि ये पांचों नेता उनके खिलाफ गहरी साजिश रच रहे हैं और उन्हें उनके भाई तेजस्वी यादव से दूर करने की कोशिश में जुटे हैं. तेज प्रताप यादव ने जिन पांच नामों को ‘जयचंद’ की श्रेणी में रखा है, वे आरजेडी के बेहद रसूखदार चेहरे हैं. आइए इन पांचों नेताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं .
कौन हैं तेज प्रताप यादव के वो ‘पांच जयचंद’?
तेजप्रताप यादव ने साजिशकर्ताओं के नाम और क्रम भी बताया है. उनके अनुसार,जयचंद्रों के क्रम में पहले नंबर पर महुआ के पूर्व विधायक मुकेश रौशन है तो नंबर दो पर राज्यसभा सांसद संजय यादव. नंबर तीन पर तेजस्वी यादव के करीबी रमीज नेमत, जबकि नंबर चार पर आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव हैं. नंबर पांच पांच पर जो नाम है वह भी चौंकाने वाला है, क्योंकि सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई के तौर पर जाने जाते हैं. आइए इन पांचों के बारे में भी जानते हैं.
मुकेश रौशन: महुआ के पूर्व विधायक और ‘नंबर एक’ दुश्मन
तेज प्रताप यादव की सूची में पहले स्थान पर मुकेश रौशन का नाम है. मुकेश रौशन वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि महुआ वही सीट है जहां से 2015 में तेज प्रताप खुद चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. बाद में तेज प्रताप ने यह सीट मुकेश रौशन के लिए छोड़ दी थी.2020 का चुनाव तेज प्रताप यादव ने समस्तीपुर से लड़ा था. इसके बाद 2025 विधानसभा चुनाव में जनशक्ति जनता दल से उन्होंने फिर महुआ से चुनावी लड़ी, लेकिन मुकेश रौशन और तेज प्रताप यादव, दोनों ही चुनाव हार गए. एक समय में तेज प्रताप के बेहद करीबी माने जाने वाले मुकेश अब उनके निशाने पर हैं.
संजय यादव: तेजस्वी के रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद
सूची में दूसरा सबसे प्रभावशाली नाम संजय यादव का है. संजय यादव वर्तमान में आरजेडी के राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें तेजस्वी यादव का ‘दायां हाथ’ माना जाता है. हरियाणा के रहने वाले संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार और रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं. तेज प्रताप यादव अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव जैसे बाहरी लोग परिवार के बीच में आकर भाई-भाई को लड़ाने का काम करते हैं. उनके लिए संजय यादव उस ‘सिस्टम’ का हिस्सा हैं जो तेज प्रताप को मुख्य राजनीति से दूर रखता है.
रमीज नेमत: तेजस्वी यादव के साये की तरह रहने वाले करीबी
तेज प्रताप ने तीसरे नंबर पर रमीज नेमत का नाम लिया है. रमीज का परिचय राजनीतिक गलियारों में तेजस्वी यादव के बेहद निजी और भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर होता है. वे अक्सर तेजस्वी के साथ उनके दौरों और बैठकों में साये की तरह नजर आते हैं. तेज प्रताप का मानना है कि रमीज जैसे लोग सूचनाओं को फिल्टर करते हैं और उनके खिलाफ तेजस्वी के कान भरते हैं. संगठन में रमीज की बढ़ती सक्रियता तेज प्रताप को हमेशा से खटकती रही है. बता दें कि तेज प्रताप यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी रमीज की लालू परिवार में घुसपैठ पर सवाल उठाया था.
शक्ति सिंह यादव: पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और प्रखर चेहरा
चौथे स्थान पर तेज प्रताप ने शक्ति सिंह यादव को रखा है. शक्ति सिंह यादव आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता हैं और टीवी चैनलों पर पार्टी का सबसे मजबूत पक्ष रखते हैं. वे हिलालपुर (हिलसा) से पूर्व विधायक भी रहे हैं. तेज प्रताप का आरोप है कि शक्ति सिंह यादव जैसे नेता सार्वजनिक रूप से तो पार्टी की बात करते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर तेज प्रताप की छवि बिगाड़ने का काम करते हैं. प्रवक्ता के तौर पर उनके बयानों और सक्रियता को तेज प्रताप ने अपनी अनदेखी से जोड़कर देखा है.
सुनील सिंह: विधान पार्षद और बिस्कोमान के अध्यक्ष
पांचवें ‘जयचंद’ के रूप में तेज प्रताप ने सुनील सिंह का नाम लिया है. सुनील सिंह बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं और बिस्कोमान के अध्यक्ष के तौर पर सहकारिता जगत का बड़ा नाम हैं. सुनील सिंह को लालू प्रसाद यादव का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है, बिहार की राजनीति में उनकी पहचान तेज प्रताप यादव की मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई के तौर पर है. अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए चर्चा में रहने वाले सुनील सिंह के साथ तेज प्रताप के रिश्ते काफी समय से तल्ख रहे हैं. तेज प्रताप को लगता है कि सुनील सिंह अपनी पहुंच का इस्तेमाल उनके राजनीतिक कद को छोटा करने में कर रहे हैं.






