खेल

MS धोनी के ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ रोल पर बवाल, आकाश चोपड़ा का फूटा गुस्सा

नई दिल्ली
पिछले कई आईपीएल सीजन से पहले ये सवाल जरूर उठता है कि क्या इस बार भी महेंद्र सिंह धोनी खेलेंगे। जब ये साफ हो जाता है कि हां, वो खेलेंगे तब सवाल थोड़ा सा बदल जाता है- क्या ये बतौर खिलाड़ी धोनी का आखिरी आईपीएल सीजन होगा? इस बार भी ये सवाल उठे। धोनी सीएसके की तरफ से आईपीएल 2026 में खेलेंगे लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि वह इम्पैक्ट प्लेयर की भूमिका में रह सकते हैं। सिर्फ बल्लेबाजी करेंगे क्योंकि सीएसके को संजू सैमसन के रूप में एक शानदार विकेटकीपर बल्लेबाज मिल ही चुका है। लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर वाली इस चर्चा से पूर्व क्रिकेटर और एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा बिदक गए हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर एमएस को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खेलना है तो बेहतर यही होगा कि वह आईपीएल में खेलने से संन्यास ही ले लें।

आकाश चोपड़ा ने कहा कि धोनी अगर खेलते हैं तो उनका मैदान पर रहना बहुत जरूरी है। वह बहुत तेज दिमाग के हैं और फील्ड पर रहकर वह खेल पर अपना अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं। टीम इंडिया के पूर्व ओपनर और कॉमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने जियोस्टार के 'आईपीएल टुडे लाइव' पर कहा, ‘आप डगआउट में बैठकर टीम नहीं चलाते हैं, यह फुटबॉल नहीं है। क्रिकेट में आपको फील्ड पर रहने की जरूरत होती है और एमएस धोनी की सबसे बड़ी ताकत खेल को किसी भी अन्य के मुकाबले बेहतर ढंग से पढ़ने की काबिलियत है। यही क्लैरिटी और प्रतिबद्धता उन्हें वो बनाती है जो वह हैं। किसी भी सूरत में, मुझे लगता है कि यह उनका आखिरी सीजन होगा।’

चोपड़ा ने आगे कहा, ‘उनके पास तो अब साफ तौर पर उत्तराधिकारी है। संजू सैमसन आखिरकार ग्लव्स संभालेंगे और यह इस सीजन में किसी भी समय हो सकता है। और फिर एमएस धोनी की फिटनेस और उनका घुटना मायने रखेगा। लेकिन वह इम्पैक्ट प्लेयर नहीं हो सकते। अगर वह इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खेल रहे हैं तो मैं समझता हूं कि अब समय आ गया है कि वह संन्यास ले लें।’

दरअसल आईपीएल में 2023 में इम्पैक्ट प्लेयर रूल लागू किया गया था। इसके मुताबिक टीमें मैच के दौरान अपनी प्लेइंग इलेवन में शामिल किसी खिलाड़ी के बदले में बाहर बैठे 5 सब्स्टिट्यूड प्लेयर्स में से किसी एक को खिला सकती हैं। टॉस के वक्त दोनों टीमों के कप्तान अंपायर को प्लेइंग इलेवन के साथ-साथ 5 सब्स्टिट्यूट खिलाड़ियों की भी लिस्ट देते हैं। अगर बल्लेबाजी के दौरान किसी टीम को लगता है कि उसके लिए सब्स्टिट्यूट प्लेयर अच्छा कर सकता है तो विकेट गिरने के बाद वह प्लेइंग इलेवन में मौजूद किसी बैटर की जगह पर उसे बल्लेबाजी का मौका दे सकता है। इसी तरह वह चाहे तो किसी सब्स्टिट्यूट प्लेयर को प्लेइंग इलेवन में शामिल किसी खिलाड़ी को बैठाकर उससे गेंदबाजी करा सकता है। तब जो खिलाड़ी बाहर होता है वो आगे फिर उस मैच में बल्लेबाजी या गेंदबाजी नहीं कर पाएगा। इस नियम की वजह से ऑलराउंडर्स की भूमिका सीमित होने की चिंताएं जताई जा रही हैं।

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