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PCS-जे मेंस परीक्षा विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की

प्रयागराज 
इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी पीसीएस-जे 2022 मुख्य परीक्षा विवाद के मामले में बुधवार को पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर की अध्यक्षता वाली न्यायिक जांच समिति की ओर से प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट को खोला गया। न्यायालय ने रिपोर्ट खोलकर रिकॉर्ड पर लिया। न्यायालय ने सभी पक्षों को प्रारंभिक रिपोर्ट कार्यालय से प्राप्त करने और तीन सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिक्रिया या शपथ-पत्र दाखिल करने को कहा है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए छह अगस्त की तारीख लगाई है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान खोली गई जस्टिस गोविंद माथुर की जांच रिपोर्ट प्रारंभिक रिपोर्ट है। एडवोकेट शाश्वत आनंद ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट दो सेट में है। 14 अन्य सेट में संलग्नक हैं। सुनवाई के दौरान याची श्रवण पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद फारमान अहमद नक़वी, अधिवक्ता शाश्वत आनंद व सौमित्र आनंद तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता निशीथ यादव उपस्थित रहे।

यूपी पीसीएस-जे 2022 की मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, मूल्यांकन में अनियमितताओं और मेरिट सूची में विसंगतियों के आरोपों से संबंधित मामले में यूपीपीएससी ने पहले स्वीकार किया था कि दो बंडलों की उत्तर पुस्तिकाओं पर गलत मास्टर फेक कोड चिपकाए गए थे, जिससे कम से कम 50 उम्मीदवारों के अंक प्रभावित हुए। न्यायमूर्ति गोविंद माथुर को इन अनियमितताओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। न्यायालय ने यूपीपीएससी को जांच पूरी होने तक सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

 

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