मध्यप्रदेश

फर्जी सॉफ्टवेयर बिलों के जरिए करोड़ों का भुगतान, लोकायुक्त को मिली हार्ड डिस्क, भोपाल निगम के डाटा एनालिसिस से और नाम होंगे उजागर

भोपाल 

भोपाल नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त की टीम ने की गई छापेमारी के दौरान सर्वर रूम से हार्ड डिस्क जब्त की है। इसका परीक्षण कराया जाएगा, जिससे यह साफ होगा कि फर्जी बिलिंग कर करोड़ों रुपए हड़पने के खेल में अपर आयुक्त वित्त गुणवंत सेवतकर के साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे और पूरा फर्जीवाड़ा किस तरह किया जाता था।

डाटा एनालिसिस के आधार पर अन्य आरोपियों के नाम सामने आने की उम्मीद है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी की गिरफ्तारी की जाएगी। शिकायतकर्ता ने गुणवंत सेवतकर के खिलाफ नामजद शिकायत की थी, इसलिए प्राथमिकी में उन्हें आरोपी बनाया गया है। उनसे अभी पूछताछ नहीं हो सकी है। जल्द ही नोटिस जारी कर उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

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शुरुआती जांच में सेंट्रल वर्कशॉप द्वारा भी बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग पास कराने के साक्ष्य लोकायुक्त के हाथ लगे हैं। इसके बाद रविवार सुबह माता मंदिर के पास स्थित सेंट्रल वर्कशॉप कार्यालय में नगर निगम की टीम ने छापा मारा और यहां से अहम दस्तावेज जब्त किए गए। यहां के जिम्मेदार अधिकारियों को भी लोकायुक्त टीम नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाएगी।

दस साल का रिकॉर्ड जब्त कर चुकी है लोकायुक्त
लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने नगर निगम के डाटा सेंटर समेत कई शाखाओं में छापेमारी कर पिछले करीब 10 साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त कर लिया। निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी।

प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 9 मार्च को आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई।

सॉफ्टवेयर से फर्जी बिल तैयार कराए
लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार कराए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया।

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