
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है, जहां से पूरे परिवार की सेहत और सौभाग्य जुड़ा होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है। वास्तु के कुछ खास नियम बताते हैं कि रसोई में तीन ऐसी चीजें हैं, जिनका डिब्बा कभी भी खाली नहीं होना चाहिए। अगर ये चीजें पूरी तरह खत्म हो जाती हैं, तो यह न केवल नकारात्मकता लाता है, बल्कि बरकत भी रोक देता है।
हल्दी
रसोई में हल्दी का डिब्बा कभी खाली नहीं होना चाहिए। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से हल्दी का संबंध बृहस्पति देव (गुरु) से माना जाता है। गुरु ग्रह हमारे जीवन में मान-सम्मान, धन और संतान सुख का कारक है।
जब घर की रसोई में हल्दी पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो इसे गुरु दोष का संकेत माना जाता है। इससे शुभ कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं और घर के सदस्यों का भाग्य कमजोर पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हल्दी के खत्म होने का मतलब है कि आप अपनी समृद्धि को खतरे में डाल रहे हैं।
नमक
नमक के बिना भोजन बेस्वाद है, और वास्तु के अनुसार नमक के बिना रसोई अधूरी है। नमक का संबंध राहु-केतु के प्रभाव को कम करने से माना गया है।
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, अगर नमक का डिब्बा पूरी तरह खाली हो जाता है, तो घर में वास्तु दोष बढ़ जाता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच अनबन और मानसिक तनाव पैदा हो सकता है। यह भी कहा जाता है कि कभी भी किसी दूसरे के घर से नमक उधार नहीं मांगना चाहिए और न ही अपने घर का नमक पूरी तरह खत्म होने देना चाहिए। नमक की कमी घर में आर्थिक तंगी का संकेत देती है।
चावल
चावल को 'अक्षत' कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो कभी समाप्त न हो। इसका संबंध शुक्र ग्रह और चंद्रमा से है। शुक्र ग्रह हमारे जीवन में भौतिक सुख, ऐश्वर्य और प्रेम का प्रतीक है।
रसोई के भंडार में चावल का पूरी तरह खत्म होना शुक्र के अशुभ प्रभाव को आमंत्रित करता है। इससे घर की सुख-शांति भंग हो सकती है और संचित धन में कमी आने लगती है। मां अन्नपूर्णा की कृपा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि चावल का डिब्बा खाली होने से पहले ही उसमें नया चावल भर दिया जाए।






