
ग्वालियर
देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती जरूरतों के बीच आम लोग परेशान हो रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें गैस कनेक्शन के झंझट में पड़े बिना भी सिलेंडर मिल सकेगा। सरकार ने बाजार में 5 किलो का छोटू गैस सिलेंडर उतार दिया है, जिसे कोई भी व्यक्ति सीधे खरीद सकता है। खाड़ी युद्ध के असर से प्रदेश में एलपीजी सप्लाई पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए यह नई व्यवस्था शुरू की गई है। खास बात यह है कि अब गैस सिलेंडर लेने के लिए न तो लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा और न ही कनेक्शन की जरूरत पड़ेगी। प्रदेशभर की तरह ग्वालियर में यह सुविधा शुरु हो रही है।
जिला आपूर्ति अधिकारी अरविंद सिंह भदौरिया के अनुसार, भरे हुए 5 किलो के इस सिलेंडर की कीमत 1642 रुपए तय की गई है, जबकि इसे 645 रुपए में रिफिल कराया जा सकेगा। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान उपलब्धता है।
छोटू सिलेंडर सिर्फ गैस एजेंसी पर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप, किराना दुकान, बर्तन की दुकान और अन्य रिटेल आउटलेट्स पर भी मिलेगा। इंडेन के सिलेंडर अधिक जगहों पर उपलब्ध होंगे, जबकि भारत गैस के सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से मिलेंगे।
खरीदने के लिए केवल आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र दिखाना होगा
इसे खरीदने के लिए केवल आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। यह पहल खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है, जिन्हें अस्थायी उपयोग, छोटे परिवार या आपात स्थिति में गैस की जरूरत होती है।
इस बीच राज्य सरकार ने सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं को अगले 3 माह में दिए जाने वाले पीएनजी कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा है। साथ ही सीजीडी संस्थाओं द्वारा रोज किए जा रहे आवेदन एवं उसके विरुद्ध दिए जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनीटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सीजीडी संस्थाओं को पाइप-लाइन अपलोड करने के निर्देश दिए गए। सीजीडी संस्थाएं जिलेवार एवं लोकेलिटीवाइज कैम्प शेड्यूल कर जिला प्रशासन एवं विभाग को जानकारी उपलब्ध कराएंगी।
बता दें कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2693 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 3552 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 10 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा 666 पेट्रोल पंपों की जांच भी की गई, जिनमें 2 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। जिला आपूर्ति अधिकारियों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं।






