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गर्भावस्था से पहले डायबिटीज को लेकर बरेत पूरी सावधानी, शिशुओं को हो सकती है आंख की समस्या

वाशिंगटन, एएनआइ। जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान या उससे पहले मधुमेह (डायबिटीज) की बीमारी होती है, उनके पैदा होने वाले बच्चों को आंख की समस्या हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।

यह अध्ययन डायबिटोलोजिया ( द जर्नल आप द यूरोपियन एसोसिएशन फार द स्टडी आफ डायबिटीज) में प्रकाशित हुआ है। इसमें माताओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज और उसका बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है। डायबिटीज के ज्यादा बढ़ने पर रिफ्रेक्टिव एरर (आरइ) की समस्या हो सकती है। यानी ऐसी स्थिति जिसमें आंख के रेटिना पर सही दृश्य नहीं बनता है। हाल के दशकों में ऐसी समस्या डायबिटीज के मरीजों में तेजी से बढ़ रही है।

अध्ययन में यह जानकारी मिली है कि जिन माताओं को डायबिटीज की समस्या है, उनके गर्भावस्था के दौरान इसका असर उनके बच्चों पर भी पड़ सकता है। अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान माता में हाइपरग्लेसेमिया (उच्च रक्त शर्करा) से इसका असर भ्रूण पर आ सकता है और इससे उस भ्रूण में भी रक्त शर्करा का स्तर पर बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में कई समस्याएं हो सकती हैं। इसका प्रभाव बच्चे के रेटिना और आंख की तंत्रिकाओं पर पड़ सकता है। आंखों के आकार पर भी यह असर डाल सकता है। यही समस्याएं आगे चलकर रिफ्रेक्टिव एरर का कारण बन सकती हैं। कह सकते हैं कि गर्भावस्था से पहले या उस दौरान माताओं में डायबिटीज को लेकर पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए।          

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