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MP में कुपोषण पर कोर्ट की सख्ती, हाईकोर्ट ने सभी जिलों से मांगी स्थिति रिपोर्ट

जबलपुर
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में कुपोषण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर 54 जिलों के कलेक्टरों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

यह याचिका अधिवक्ता दीपांकर सिंह द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, मिड डे मील, आंगनवाड़ी और मातृत्व लाभ जैसी योजनाएं कागजी साबित हो रही हैं। याचिका में दावा किया गया है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति में भारी अंतर है।

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21, 39, 45 और 47 का हवाला देते हुए इन योजनाओं को संवैधानिक जिम्मेदारी से जोड़ा है। याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए फर्जी पंजीकरण, कम उपस्थिति और आपूर्ति में अनियमितताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है।

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कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

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