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मंडी में टमाटर की भारी आवक के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट, किसानों को बड़ा नुकसान

इंदौर

इंदौर की देवी अहिल्याबाई फल एवं सब्जी मंडी में इन दिनों टमाटर की भारी आवक हो रही है। रोजाना लगभग 6 से 7 हजार कैरेट टमाटर मंडी में पहुंच रहा है, जिससे टमाटर के दामों में तेजी से गिरावट आई है। वर्तमान में टमाटर की कीमत गुणवत्ता के आधार पर केवल 3 से 5 रुपए प्रति किलो तक रह गई है, जबकि प्रति कैरेट दर 50 से 80 रुपए तक पहुंच गई है। मंडी व्यापारियों के अनुसार, टमाटर के दामों में गिरावट का मुख्य कारण इसकी अधिक आवक के साथ-साथ केचअप फैक्टरियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही खरीदी भी है। इसके अलावा, अप्रैल-मई में महाराष्ट्र से नई फसल आने के बाद भी कीमतों में सुधार की संभावना कम बताई जा रही है।

किसान को लागत भी नहीं निकल रही
खरगोन के किसान अशोक वर्मा, भूपेंद्र वर्मा और जीतू बागड़ी का कहना है कि मौजूदा दरों पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक कैरेट टमाटर की लागत 80 से 90 रुपए तक आती है, जिसमें तुड़ाई, गाड़ी भाड़ा, मजदूरी, बीज, खाद और दवाई का खर्च शामिल है। अभी प्रति कैरेट दर 50 से 80 रुपए तक पहुंच गई है। किसानों के पास टमाटर को खेतों में खराब होने से बचाने के लिए मंडी में बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सर्दियों में हरी सब्जियों की अधिक उपलब्धता के कारण टमाटर की मांग कम हो जाती है, जिससे इसके दाम गिर जाते हैं। गर्मियों में जब आवक घटकर 2 से 3 हजार कैरेट रह जाती है, तब टमाटर के दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं। यही टमाटर बारिश और सर्दियों के मौसम में 1000 से 1200 रुपए प्रति कैरेट तक बिकता है।

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टमाटर उगाने वाले किसान परेशान
टमाटर की फसल दो प्रकार से लगाई जाती है। पहली विधि में इसे जमीन पर सीधे बोया जाता है और दूसरी विधि में इसे तार और बांस-बल्लियों के सहारे बेल के रूप में चढ़ाया जाता है। जमीन पर लगाई गई टमाटर की फसल में लागत कम आती है, लेकिन यह टमाटर जल्दी खराब हो जाता है। इसके अलावा, स्टोरेज में भी इसे रखना मुश्किल होता है, जिससे इसकी मांग फिलहाल कम है। दूसरी ओर, तार-बांस-बल्लियों पर चढ़ाई गई बेल वाली टमाटर की फसल ज्यादा समय तक टिकती है, जिससे इसकी मांग अधिक बनी रहती है।

मई से अक्टूबर तक टमाटर के दाम थे आसमान पर
व्यापारी विनोद भिलवारे और फारूक राइन ने बताया कि मई से अक्टूबर के बीच टमाटर की कीमतें 1500 से 2000 रुपए प्रति कैरेट तक पहुंच गई थीं। इसके बाद नवंबर-दिसंबर में ठंड शुरू होते ही भारी मात्रा में टमाटर की आवक होने लगी, जिससे दाम घटकर 500 से 700 रुपए प्रति कैरेट तक रह गए। अब मार्च में टमाटर के दामों में भारी गिरावट आई है और भाव औंधे मुंह गिरते हुए 50 से 80 रुपए प्रति कैरेट तक आ पहुंचे हैं। एक कैरेट में लगभग 25 किलो टमाटर होता है। इस तरह प्रति किलो टमाटर का दाम केवल 3 से 5 रुपए तक रह गया है। मौजूदा समय में रोजाना 6 से 7 हजार कैरेट टमाटर मंडी में पहुंच रहा है।

तीन तरह के लोकल टमाटर की आवक
व्यापारी फारूक राइन ने बताया कि इंदौर के आसपास के क्षेत्रों जैसे महेश्वर, मंडलेश्वर, खरगोन, राजगढ़-धार, सेंधवा के पास नागलवाड़ी, बलवाड़ी गांवों से बड़ी मात्रा में देसी, हाईब्रिड और हिम सोना किस्म के टमाटर की भारी आवक हो रही है। इस ठंडे मौसम में टोमेटो केचअप बनाने के लिए फैक्ट्री मालिक बड़ी मात्रा में खरीदी कर रहे हैं, क्योंकि इस दौरान टमाटर काफी सस्ता हो जाता है। इसके अलावा, राजस्थान के भीलवाड़ा, जयपुर, चोमू, मध्यप्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और उत्तर प्रदेश के झांसी जैसे क्षेत्रों की मंडियों में भी इन क्षेत्रों से टमाटर की बड़ी मात्रा में आपूर्ति हो रही है। इसी कारण इंदौर की चोइथराम मंडी में टमाटर की खपत घट गई है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में उपजाया गया टमाटर स्थानीय स्तर पर ही खपाया जा रहा है।

 

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