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असम में मंदिरों के पांच किमी दायरे में पशु वध प्रतिबंधित, विधानसभा ने पारित किया पशु संरक्षण विधेयक

गुवाहाटी, प्रेट्र। असम में अब मंदिरों के पांच किमी दायरे में पशु वध नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में असम विधानसभा ने पशु वध, उपभोग एवं परिवहन नियमन करने के लिए लाया गया विधेयक पारित कर दिया। विपक्षी पार्टियों ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की जिसे सरकार ने ठुकरा दिया। इसके विरोध में विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।

विधेयक पारित होते ही सदन ‘जय श्रीराम’ के नारे से गूंजने लगा

विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमरे ने शुक्रवार को जैसे ही असम पशु संरक्षण विधेयक 2020 पारित होने की घोषणा की, सत्ताधारी भाजपा सदस्यों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।

प्रवर समिति के पास भेजने की मांग ठुकराने पर विपक्ष का बहिर्गमन

जिस समय विधेयक विचार के लिए लाया गया उसी समय एकमात्र निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई सदन से उठकर चले गए। विपक्षी कांग्रेस, एआइयूडीएफ और माकपा ने सरकार से विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति के पास विचार के लिए भेजने का आग्रह किया। लेकिन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते समय प्रस्ताव ठुकरा दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा- विधेयक को लेकर हमारी बुरी मंशा नहीं, इससे सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा

अपने जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक को लेकर हमारी कोई बुरी मंशा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इससे सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि विधेयक का उद्देश्य किसी को गोमांस खाने से रोकना नहीं है, बल्कि जो लोग खाते हैं वे दूसरे की धार्मिक भावनाओं का भी आदर करें।

सरमा ने कहा- सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हिंदू ही जवाबदेह नहीं हैं, मुस्लिम भी उत्तरदायी हैं

सरमा ने कहा, ‘सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए केवल हिंदू ही जवाबदेह नहीं हैं, मुस्लिम भी उतने ही उत्तरदायी हैं।’ विधेयक में मंदिरों के पांच किलोमीटर के दायरे में पशु वध पर प्रतिबंध लगाए जाने के क्लाज पर विपक्ष की आपत्ति का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कई-कई किलोमीटर के ऐसे क्षेत्र हैं जहां कोई मंदिर नहीं हैं।

असम में 70 से 80 हजार ऐसी बस्तियां हैं जहां एक भी हिंदू नहीं

राज्य में 70 से 80 हजार ऐसी बस्तियां हैं जहां एक भी हिंदू नहीं हैं। उन्होंने हालांकि एआइयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम द्वारा लाया गया संशोधन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इस्लाम ने विधेयक में परिभाषा से भैंसे को हटाने का प्रस्ताव किया था।

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