उत्तर प्रदेश

अखिलेश यादव का मॉनसून ऑफर, सौ लाओ सरकार बनाओ, सपा अध्यक्ष अखिलेश का इशारा किस तरफ है?

लखनऊ

यूपी में लोकसभा चुनाव हार के बाद बीजेपी में मचे घमासान के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने  डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर लगातार तंज कस रहे हैं। अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए इशारों में अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि मॉनसून ऑफर है 100 लाओ, सरकार बनाओ। सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार सुबह अपने ऑफिशियल हैंडल पर एक पोस्ट कर लिखा कि मॉनसून ऑफर 100 लाओ सरकार बनाओ। इस पोस्ट को केशव प्रसाद मौर्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

लगातार गहराया हुआ है बीजेपी में विवाद

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लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से उत्तर प्रदेश भाजपा में लगातार विवाद गहराया हुआ है। पार्टी को चुनाव में मार्च 33 सीटों पर जीत मिली। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी यूपी की राजनीति में नंबर वन बन गई है। पार्टी को 37 सीटों पर जीत मिली। सहयोगी कांग्रेस 6 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। इसके बाद से लगातार भाजपा में मंथन का दौर जारी है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर चल रहा है।

इन बैठकों के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने संगठन को सरकार से बड़ा बताकर प्रदेश के राजनीति में अलग ही बहस छेड़ दी है। सरकार बड़ा या संगठन बहस का मुद्दा बन गया है। इस बीच विपक्षी दल भाजपा के भीतर बढ़ी हलचल के बीच अपनी रणनीति को जमीन पर उतरने की कोशिश में जुट गए हैं। इस क्रम में अखिलेश यादव ने केशव प्रसाद मौर्य को एक बार फिर सरकार बनाने का मॉनसून ऑफर दे दिया है। 100 विधायकों को लाने पर सरकार बनाने का ऑफर दिया गया है।

क्या विधानसभा का गणित?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय भारतीय जनता पार्टी 251 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। वहीं, समाजवादी पार्टी के पास 105 विधायक हैं। अपना दल सोनेलाल 13 विधायकों के साथ तीसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय लोक दल के पास आठ विधायक हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पास 6, निषाद पार्टी के पास पांच, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास दो, कांग्रेस के पास दो और बहुजन समाज पार्टी के पास एक विधायक हैं। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े के लिए 202 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है। वहीं, पार्टी को तोड़ने के एक दो-तिहाई विधायक जरूरी होते हैं। ऐसे में किसी भी नेता के भाजपा को तोड़ने के लिए कम से कम 167 विधायकों का एक तरफ आना जरूरी होगा।

ऐसे में अगर भारतीय जनता पार्टी के 100 विधायकों के साथ केशव प्रसाद मौर्य अलग गुट बनाकर अखिलेश यादव से मिलते हैं तो फिर वह सरकार बना सकते हैं। हालांकि, इस प्रकार की स्थिति में पाला बदलने वाले विधायकों पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, केशव प्रसाद मौर्य लगातार भारतीय जनता पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के ऑफर को तंज के रूप में ही देखा जा रहा है।

यूपी में खूब हो रही है राजनीति

यूपी में इन दिनों में राजनीति काफी गहराई हुई है। यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने प्रदेश में पार्टी की हार की वजहों से संबंधित रिपोर्ट प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक सौंप चुके हैं। इस दरम्यान प्रदेश में कार्यकर्ताओं की स्थिति की भी खूब चर्चा की गई है। मामले में पार्टी आलाकमान सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक कर सकती है। वहीं, विपक्षी दल भाजपा को अब संतुलित नहीं होने देने की रणनीति पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं। अखिलेश यादव के बयान को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य की नाराजगी को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

इससे पहले अखिलेश यादव ने बुधवार को पोस्ट कर कहा था कि यूपी की बीजेपी में कुर्सी की लड़ाई चल रही है। उत्तर प्रदेश में शासन प्रशासन ठंडे बस्ते में चला गया है। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ की राजनीति का काम जो भाजपा दूसरे दलों में करती थी। वही काम वह अपने दल के अंदर कर रही है इसलिए बीजेपी अंदरूनी झगड़ों के दलदल में धसती जा रही है। यूपी की जनता के बारे में बीजेपी में कोई सोचने वाला नहीं है। इसके बाद देर रात को रात को अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि लौट के बुद्धू घर वापस आए। हालांकि अखिलेश यादव के वार पर केशव प्रसाद मौर्य ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव बीजेपी कि देश और प्रदेश दोनों जगह मजबूत संगठन और सरकार है। सपा का पीडीए धोखा है। यूपी में सपा के गुंडाराज की वापसी संभव है। बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव में 2017 दोहराएगी।

 

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