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दुर्गा प्रतिमाओं का बड़ा सफर: काशी से ओडिशा और लखनऊ तक जाएंगी 64 देवी-देवताओं की मूर्तियां

वाराणसी

नवरात्र में अब 10 दिन बचे हैं। दुर्गा पूजा के लिए काशी सजने-संवरने लगी है। यहां तैया हो रहीं दुर्गा प्रतिमाएं पूर्वांचल के अलावा उड़ीसा और लखनऊ भी जाएंगी। बनारस से बाहर मां दुर्गा सहित कुल 64 विग्रहों की प्रतिमाएं जाएंगी। बंगलाचाल की प्रतिमाएं भी रहेंगी।

मिनी बंगाल के नाम से मशहूर काशी में दुर्गा पूजा की तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न थीम पर मूर्तियां बन रही हैं। यहां से बाहर भी प्रतिमाएं जाएंगी। प्रख्यात मूर्तिकार अभिजीत विश्वास ने बताया कि उड़ीसा के काला हंडी जिले के लिए भी ऑडर आया था। यहां बंगलाचाल मां दुर्गा के साथ कुल आठ विग्रहों की मूर्तियां जाएंगी। जबकि लखनऊ में भी बंगलाचाल की प्रतिमा भेजी जाएगी। यहां के लिए कुल 32 प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं। लखनऊ में छह साल से प्रतिमा जा रही है।

पूर्वांचल में मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर के लिए 40 प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं। अभिजीत विश्वास ने बताया कि मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश जी व कार्तिकेय, शेर व राक्षस सहित कुल आठ प्रतिमाएं रहती हैं।

खोजवां, देवनाथपुरा, शिवपुर, अखरी बाईपास आदि इलाकों में दुर्गा प्रतिमाएं तैयारी हो रही हैं। पश्चिम बंगाल से भी मूर्तिकार बुलाए गए हैं, जो रातभर मूर्तियों को निखारने में लगे हैं। जिले में पांच सौ से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं बैठाई जाएंगी।

आतंकवाद के नाश से शांति का संदेश मुद्रा तक की होंगी मां की मूर्तियां
बनारस में परंपरागत मूर्तियों के अलावा विभिन्न थीम पर आधारित प्रतिमाएं बन रही हैं। अभिजीत विश्वास ने बताया कि पूजा समितियां नई थीम पर ज्यादा मूर्तियों को बनवाने की मांग कर रही हैं। ऐसे में बंगलाचाल के अलावा काशी की शैली की प्रतिमाएं काफी बन रही हैं। इस बार यहां के बड़े पूजा पंडालों में 18 हाथों वाली मां दुर्गा, शांति का संदेश देते मुद्रा में, ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद, पर्यावरण संरक्षण व महिला सशक्तीकरण आदि पर आधारित मां का स्वरूप दिया जा रहा है। मूर्तियों में देशभक्ति और नारी शक्ति का अनूठा संगम भी दिखेगा।

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