
पटना
राज्य में खेल आधारभूत संरचनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित एथलेटिक्स ट्रैक और प्राकृतिक घास वाले खेल मैदान का करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण कराया जा रहा है। इस परियोजना पर काम शुरू हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके तहत 400 मीटर के आठ लेन वाले सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक को विश्व एथलेटिक्स के निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। ट्रैक के लिए वर्ल्ड एथलेटिक्स क्लास-1 सर्टिफिकेशन हासिल करने का लक्ष्य है। ऐसा होने पर बिहार को इस श्रेणी का पहला सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक मिलेगा।
पुरानी सतह हटाकर बिछाई जाएगी नई सिंथेटिक परत
खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (बीएसएसए) की ओर से कराए जा रहे इस कार्य के तहत मौजूदा सिंथेटिक ट्रैक की पुरानी सतह हटाई जाएगी। इसके बाद पुरानी डामर की परत की मशीन से मिलिंग कर नई डामर की परत बिछाई जाएगी। इस पर फुल-पीयूआर और फुल-ईपीडीएम तकनीक से आधुनिक सिंथेटिक सतह तैयार की जाएगी।
इससे खिलाड़ियों को दौड़ने के दौरान बेहतर ग्रिप, लचीलापन और उच्च गुणवत्ता वाली सतह मिलेगी। ट्रैक पर जलजमाव रोकने के लिए नई ड्रेनेज लाइनें और कलेक्शन चैंबर भी बनाए जाएंगे। साथ ही विश्व एथलेटिक्स के मानकों के अनुरूप नए एथलेटिक्स उपकरण लगाए जाएंगे।
बरमूडा घास से विकसित होगा प्राकृतिक मैदान
एथलेटिक्स ट्रैक के साथ प्राकृतिक घास वाले खेल मैदान का भी कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए बजरी की जल निकासी परत के ऊपर रेत आधारित रूटजोन तैयार किया जाएगा। इसके बाद मैदान में बरमूडा घास लगाई जाएगी। मैदान के नीचे ड्रेनेज पाइप बिछाए जाएंगे, ताकि बारिश और सिंचाई का अतिरिक्त पानी तेजी से बाहर निकल सके। घास की नियमित और समान सिंचाई के लिए आधुनिक पॉप-अप स्प्रिंकलर सिस्टम भी लगाया जाएगा। इससे मैदान की घास स्वस्थ रहेगी और खिलाड़ियों को खेलने के लिए एक समान एवं बेहतर सतह उपलब्ध होगी।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी को मिलेगी मजबूती
इन सुविधाओं के विकसित होने से बिहार के एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अभ्यास करने का अवसर मिलेगा। बेहतर सिंथेटिक ट्रैक, आधुनिक खेल उपकरण और उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक मैदान से खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन और उनकी तैयारी के लिए भी बेहतर आधारभूत संरचना उपलब्ध होगी।






