मध्यप्रदेश

पंजाब को भी पीछे छोड़ने वाले विदिशा में फिर जली पराली, प्रशासन ने की कार्रवाई

 विदिशा
 राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से पराली ( नरवाई) जलाने से पर्यावरण और खेती को हो रहे नुकसान को बताने के लिए गांव – गांव अभियान चला रही हैं। किसान भी इसके खतरे को जानने और समझने लगे है। बावजूद इसके वे मामूली खर्च बचाने के लिए खेतों में फसल के अवशेष मशीनों से हटाने की बजाय आग लगाने से बाज नहीं आ रहे है।

पराली जलाने के मामले में पंजाब के जिलों को भी पीछे छोड़ा

    प्रदेश ही नहीं पूरे देश में शरबती गेहूं के लिए पहचाने जाने वाले विदिशा जिले में पराली जलाने के मामले में पंजाब के जिलों को भी पूछे छोड़ दिया है। पिछले साल विदिशा जिला पराली जलाने के मामले में देश में पहले स्थान पर था। इस साल फिर खरीफ सीजन की फसल कटते ही पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्र सरकार के आईसीएआर की सोमवार तक की रिपोर्ट देखे तो पूरे प्रदेश में 521 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई है। इसमें विदिशा की 14 घटनाएं शामिल है।

वर्ष 2020 से अब तक वर्ष 2026 की इस अवधि में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े देखे तो इसमें कमी दिखाई देती है। वर्ष 2020 में 15 सितम्बर से 19 अक्टूबर के बीच 60 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इस लिहाज से वर्तमान के आंकड़ों में गिरावट आई है लेकिन आने वाले दिनों में यह रफ्तार धीमी रहेगी। इसमें संशय है क्योंकि पिछले साल इसी अवधि में काटे 12 घटनाएं दर्ज हुई थी लेकिन दिसंबर तक आते-आते यह आंकड़ा चार हजार के पार पहुंच गया था जो देश में सबसे अधिक था।

शुरुआत से ही सख्ती की तैयारी में प्रशासन
पिछले साल के अनुभव को देखते हुए इस वर्ष जिला प्रशासन पराली जलाने को लेकर अभी से सख्त और सतर्क हो गया है। चार दिन पहले कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों में पराली जलाने वाले दो किसानों के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। अधिकारियों का कहना है कि खेतों में पराली जलाने वालों में बड़े किसान अधिक है। लेकिन वे समय और पैसा बचाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से नहीं हिचक रहे है।

गांव-गांव किसानों को जागरूक कर रहा अमला
कृषि विभाग के उप संचालक सचिन जैन का कहना है कि इन दिनों कृषि विभाग का पूरा मैदानी अमला गांव – गांव चौपाल लगाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने में लगा है। इस बार विभाग ने कुछ वीडियो भी बनाये है। जिसके माध्यम से भी किसानों को खेतों में पराली नुकसान के साथ ही पराली प्रबंधन की भी जानकारी दी जा रही है।

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