छत्तीसगढ़

जशपुर में दंतैल हाथी की दस्तक, अस्पताल-कॉलेज और चर्च की बाउंड्री तोड़ी; वन विभाग अलर्ट

बिलासपुर
सुबह का वक्त था. बच्चे स्कूल के हॉस्टल में थे. किसान अपने खेतों में धान की फसल को लेकर उम्मीद लगाए हैं. तभी खबर आई कि इलाके में हाथियों का झुंड पहुंच गया है. एक-दो नहीं, पूरे 53 हाथी. स्कूल की बाउंड्री टूट गई. खेतों में खड़ी फसल रौंद दी गई. अब जरा छत्तीसगढ़ के दूसरे जिले की तस्वीर देखिए. यहां हाथियों का पूरा झुंड नहीं, बल्कि एक दंतैल हाथी शहर के भीतर पहुंच गया. कभी अस्पताल परिसर, कभी कॉलेज और फिर चर्च तक. तीन जगहों की बाउंड्रीवाल टूट गई.

ये दोनों घटनाएं रविवार को छत्तीसगढ़ के कोरबा और जशपुर में सामने आईं. कोरबा में 53 हाथियों के झुंड ने मिशन स्कूल और किसानों के खेतों में नुकसान पहुंचाया. वहीं, जशपुर जिले के कुनकुरी में झुंड से बिछड़ा एक दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया. वन विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं. सवाल ये है कि जंगल में रहने वाले हाथी स्कूल, खेत, अस्पताल और शहर तक कैसे पहुंच रहे हैं? और जब ऐसा होता है, तो इंसानों और हाथियों, दोनों को सुरक्षित कैसे रखा जाए?
पहली कहानी कोरबा जिले के तेलियामार की है. यहां जंगली हाथियों का एक बड़ा झुंड मिशन स्कूल के पास पहुंच गया. झुंड में कुल 53 हाथी थे. हाथियों ने स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी. स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के बीच डर का माहौल बन गया. नुकसान सिर्फ स्कूल की दीवार तक सीमित नहीं रहा. हाथियों के झुंड ने आसपास के खेतों में धान की फसल को रौंद डाला. सवाल है कि 53 हाथियों का इतना बड़ा झुंड आबादी के करीब पहुंच जाए, तो उससे निपटने की तैयारी कैसी होनी चाहिए? क्योंकि हाथियों को देखकर शोर मचाना, उनके करीब जाना या उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करना खतरे को बढ़ा सकता है.

अब जशपुर की कहानी सुनिए, जहां दंतैल शहर में घुस आया
दूसरी घटना जशपुर जिले के कुनकुरी की है. यहां एक दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया. दंतैल यानी नर हाथी, जिसके लंबे दांत बाहर निकले होते हैं. इस हाथी की मौजूदगी ने इलाके में हलचल पैदा कर दी. वह हॉली क्रॉस मिशन हॉस्पिटल के परिसर तक पहुंच गया और वहां की बाउंड्रीवाल तोड़ दी.

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इसके बाद हाथी लोयला कॉलेज परिसर में पहुंचा. फिर उसकी मौजूदगी चर्च परिसर में भी देखी गई. हाथी ने कुल तीन स्थानों की बाउंड्रीवाल को नुकसान पहुंचाया.

अक्सर हाथी को देखने की उत्सुकता में लोग घरों से बाहर निकलने लगते हैं. कोई मोबाइल से वीडियो बनाना चाहता है, कोई पास जाकर उसे देखना चाहता है. लेकिन हाथी कोई ऐसा जानवर नहीं है, जिसके सामने खड़े होकर आराम से वीडियो बनाया जा सके. वह डर जाए, खुद को घिरा हुआ महसूस करे या अचानक दिशा बदल दे, तो गंभीर हादसा हो सकता है. इसीलिए वन विभाग की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ हाथी की लोकेशन पता करना नहीं, बल्कि लोगों को उससे सुरक्षित दूरी पर रखना भी है.

जंगल से बस्ती तक पहुंचने की वजह क्या है?
सवाल है कि हाथी आबादी के करीब पहुंचते ही क्यों हैं? इसकी कोई एक वजह हर मामले में नहीं होती. हाथियों की आवाजाही पर जंगल में भोजन और पानी की उपलब्धता, उनके पारंपरिक रास्ते, जंगलों के आसपास खेती और मानवीय गतिविधियों का असर पड़ सकता है. लेकिन कोरबा और कुनकुरी की इन दोनों घटनाओं में हाथियों के आबादी तक पहुंचने की सटीक वजह सामने नहीं आई. हाथियों के रास्तों और इंसानी बस्तियों के बीच टकराव की समस्या केवल दीवार टूटने या फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं रहती. कई बार इससे इंसानों की जान पर खतरा पैदा हो जाता है.

कोरबा के वन मंडलाधिकारी जितेंद्र शुक्ला के मुताबिक, हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग की टीमें लगातार नजर रख रही हैं. उन्होंने बताया कि हाथी ऐप के जरिए ग्रामीणों को भी हाथियों की मौजूदगी के बारे में तत्काल सूचना दी जा रही है. अधिकारी के अनुसार, जनहानि की खबर नहीं है. वन विभाग इतने बड़े झुंड पर निगरानी रखे हुए है, ताकि हाथियों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने दिया जा सके.

हाथी ऐप से समय पर मिली जानकारी लोगों को सतर्क रहने का मौका देती है. अगर ग्रामीणों को पता हो कि हाथियों का झुंड किस दिशा में बढ़ रहा है, तो वे उस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं और बच्चों को भी सुरक्षित रख सकते हैं. हालांकि, केवल सूचना देना ही पर्याप्त नहीं है. ऐसी घटनाओं में स्थानीय स्तर पर निगरानी, लोगों को जागरूक करना और हाथियों की आवाजाही के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना भी होता है.

हाथी दिख जाए, तो क्या नहीं करना चाहिए?
अगर गांव के रास्ते में सामने हाथी दिखाई दे जाए. या फिर मोबाइल पर सूचना आए कि पास के खेत में हाथियों का झुंड मौजूद है. ऐसे में सबसे जरूरी है कि हाथी के पास जाने या उसका रास्ता रोकने की कोशिश करने से बचा जाए. हाथी को घेरने या उसे उकसाने से बचना चाहिए. उसके सामने भीड़ लगाकर वीडियो नहीं बनाना चाहिए.

बच्चों और दूसरे लोगों को हाथी के करीब नहीं जाने देना चाहिए. स्थानीय वन विभाग को जानकारी देनी चाहिए. सुरक्षित दूरी बनाए रखकर वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए. खासकर जब हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद हो, तब यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है कि वे किस दिशा में जाएंगे. इसलिए उन्हें अपनी तरफ से भगाने की कोशिश करने के बजाय वनकर्मियों को स्थिति संभालने देना ज्यादा सुरक्षित है.

कोरबा में 53 हाथियों का झुंड मिशन स्कूल की बाउंड्री तोड़कर खेतों तक पहुंचा. जशपुर के कुनकुरी में एक दंतैल हाथी अस्पताल, कॉलेज और चर्च परिसर तक पहुंच गया. एक तरफ स्कूल में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ किसानों की मेहनत से तैयार होती फसल का. और इन सबके बीच उन लोगों की चिंता भी है, जिन्हें रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है. फिलहाल वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है.

 

 

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