छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षक भर्ती परीक्षा टली, सभी आरक्षित श्रेणियों को मौका मिलने तक नहीं होगा एग्जाम

 बिलासपुर
 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की डिवीजन बेंच ने भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया।इसके बाद छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा स्थगित कर दी। बता दें कि भर्ती परीक्षा में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि सहायक शिक्षक भर्ती के कुल 2,292 पदों के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को प्रस्तावित थी। वहीं शिक्षक भर्ती के 1,654 पदों में के लिए लिखित परीक्षा 25 अक्टूबर को होनी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं मिला। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है।

हालांकि, समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी कर सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित (बी) श्रेणी को शामिल किया।हालांकि, अधिसूचना जारी होने से पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इसलिए इस श्रेणी को वर्तमान भर्ती में शामिल करना कानूनी रूप से संभव नहीं था।

Related Articles

संशोधित विज्ञापन जारी कर सकती है सरकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि संशोधन केवल सहायक शिक्षक भर्ती के लिए जारी किया गया है, शिक्षक भर्ती के लिए नहीं। परीक्षा की तारीखें नजदीक होने के कारण डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश जारी किया है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को होने वाली सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा और 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शिक्षक भर्ती परीक्षा तब तक नहीं होगी, जब तक विज्ञापन में सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल कर संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर नहीं दिया जाता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य शासन नियमानुसार संशोधित विज्ञापन जारी कर सकता है या सभी आरक्षित श्रेणियों को शामिल करते हुए नया विज्ञापन निकाल सकता है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप
कोरबा की रहने वाली मीनाक्षी मंगलेकर और बाकी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है।

इससे वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। याचिका में इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी गई है।

संशोधित विज्ञापन में भी दृष्टिबाधितों को शामिल नहीं किया
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञापन में संशोधन की सूचना 9 अक्टूबर को रायपुर और बिलासपुर के अखबारों में प्रकाशित की गई है। इसे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। संशोधन में आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है।

शासन ने कहा कि आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 निकल चुकी है। ऐसे में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देना संभव नहीं है।

इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब संशोधन के जरिए आरक्षित पदों का श्रेणीवार बंटवारा किया गया है, तो दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों की श्रेणी को शामिल नहीं करने का प्रथम दृष्टया कोई उचित कारण नजर नहीं आता।

जानिए… क्या है दिव्यांगों के लिए आरक्षण का नियम
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के तहत सरकारी संस्थानों में सीधी भर्ती के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को कम से कम 4% आरक्षण देने का प्रावधान है। इसमें दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।

आरक्षण का लाभ लेने के लिए सामान्यतः 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जरूरी है। याचिका में इसी 4% आरक्षण के तहत दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए पद आरक्षित नहीं करने को चुनौती दी गई है।

 

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button